ताजमहल की 500 मीटर की परिधि में व्यापारिक गतिविधियां हटाने की डेडलाइन के महज 72 घंटे ही शेष रह गए हैं। पीढ़ी दर पीढ़ी व्यापार कर रहे स्थानीय लोगों को भविष्य की चिंता सता रही है। अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बात कहकर कोई राहत देने में असमर्थता जताई है। हालांकि इस बीच पर्यटन मंत्री के समाधान तलाशने के आश्वासन से कुछ उम्मीद जगी है।
प्रशासन ने कारोबारियों को व्यापारिक गतिविधियां बंद करने के लिए 17 अक्तूबर तक का समय दिया है। इसके बाद जबरन दुकानें हटाने की चेतावनी दी गई है। व्यापारी राहत के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों के पास चक्कर काट रहे हैं। कुछ व्यापारी सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर करने के लिए गए हुए हैं। सभी अपने पुराने से पुराने दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं। चिंता कम नहीं हो रही। पूर्वी गेट पर हैंडीक्राफ्ट की दुकान चलाने वाले मुबारक बताते हैं कि वह तीसरी पीढ़ी से हैं, जब से वह यह कारोबार कर रहे हैं। अब एकाएक कहां जाएं, क्या करें।
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ताजगंज में दुकाने बंद
- फोटो : अमर उजाला
इधर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह की ओर से कुछ राहत की उम्मीद जगी है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने पर्यटन मंत्री से मुलाकात करके ताजगंज प्रकरण की जानकारी दी। इस पर मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वह मोहलत बढ़वाने के लिए प्रमुख सचिव से बात करेंगे। समाधान तलाशेंगे। ताजगंज डेवलपमेंट फाउंडेशन के अध्यक्ष नितिन कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कोर्ट के लिए रिट तैयार कर ली गई है। सोमवार को रिट दायर करने की कोशिश करेंगे।
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ताजगंज में दुकाने रहीं बंद
- फोटो : अमर उजाला
भगवान ही मालिक है
60 वर्षीय दुकानदार निरंजन लाल ने बताया कि परबाबा ने दुकान शुरू की थी। 1984 में जब यहां पर टिकट विंडो बनाई गई थी, तभी से यहां पर दुकान हैं। दुकान बंद होगी तो क्या करेंगे। अब तो भगवान ही मालिक है।
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ताजगंज में दुकाने रहीं बंद
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दस लोगों का परिवार है आश्रित
व्यापारी घनश्याम ने बताया कि परबाबा छिंगा बाबा ने यहां पर दुकान खोली थी। 8 से 10 लोगों का परिवार इसी दुकान पर आश्रित है। उनकी दुकान पर काम करने वाले जितेंद्र सिंह ने भी चिंता जताई। बोले कि पिछले 45 सालों से यहां काम कर रहे हैं। अगर दुकान बंद होती है वह कहां पर नौकरी के लिए जाएंगे। पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।
आयुष गुप्ता का कहना है कि कारोबारियों में उनकी चौथी पीढ़ी है। उनके परबाबा क्रांतिकारी वासुदेव गुप्ता ने यहां पर कारोबार डाला था। हमारे पास सभी दस्तावेज मौजूद हैं। जमीन हमारी है, फिर भी हमसे खाली करवाई जा रही है।