ताजमहल के तहखाने के कमरों को खोलने की हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर सुनवाई टल गई, लेकिन यह विवाद गहरा गया है। इन विवादों को नाता सीधे सीधे पर्यटन उद्योग से है, जो पूरी तरह से ताजमहल पर निर्भर है। पर्यटन उद्योग के लोगों का भी मानना है कि ताजमहल जब तक पर्यटकों के लिए खुला था, तब तक कोई विवाद पनप नहीं पाया, लेकिन जैसे ही सैलानियों के लिए ताजमहल के हिस्सों को बंद किया गया और ताले लगने शुरू हुए, वैसे वैसे विवाद गहराता चला गया। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने 50 वर्षों में ताजमहल का बड़ा हिस्सा पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। सैलानियों की दूरी जैसे-जैसे ताज से बढ़ी, वैसे वैसे ताज के तहखाने और धार्मिक नजरिए से देखने का विवाद गहराता चला गया।
सबसे पहले मीनारें, फिर तहखाना किया बंद
ताजमहल की चारों मीनारों में पर्यटक पहले न केवल घूम फिर सकते थे, बल्कि सबसे ऊपर भी पहुंच सकते थे, लेकिन कई पर्यटक जोड़ों द्वारा मीनारों से कूदकर आत्महत्या करने के मामलों पर सुरक्षा कारणों से इन्हें सबसे पहले बंद किया गया। ताजगंज निवासी और खुद्दाम ए रोजा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरुद्दीन ताहिर बताते हैं कि आत्महत्या के मामलों के बाद मीनारों पर प्रवेश बंद कर दिया गया और मीनारों में नीचे दरवाजों पर ताला लगाया गया। 1970 के दशक में मीनारें बंद होने के बाद तहखानों को बंद किया गया।