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Taj Mahal Controversy: ताजमहल पर विवाद के बाद तहखाने के संरक्षण की तस्वीरें हुईं जारी

Sun, 15 May 2022 09:32 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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तहखाने के संरक्षण की पहले और बाद की तस्वीरें हुईं जारी - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल के तहखाने के 20 कमरों को खोलने की याचिका के बाद हुए विवाद को रोकने लिए एएसआई ने तहखाने की तस्वीरें जारी की हैं। एएसआई ने पांच महीने बाद जनवरी-2022 के न्यूज लेटर को जारी किया, जिसमें ताजमहल के उत्तरी छोर के तहखानों में किए गए प्लास्टर और लाइम पनिंग की तस्वीरें हैं। एएसआई ने अपनी वेबसाइट asi.nic.in के होम पेज पर ही जनवरी का यह न्यूज लेटर जारी किया है। हाईकोर्ट की ओर से डॉ. रजनीश कुमार की याचिका खारिज कर दी गई, पर इस विवाद को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने तहखाने की तस्वीरें जनवरी के न्यूज लेटर में पेज नंबर 20 पर जारी किया है। इन दो फोटो में दीवारों और छत के डायमंड कट पर पनिंग को दिखाया गया है। छह लाख से संरक्षण किया गया। पहली बार तहखाने के संरक्षण से पहले और बाद की तस्वीरें जारी की गई हैं।
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तहखाने के संरक्षण की तस्वीरें - फोटो : अमर उजाला
अधीक्षण पुरातत्वविद राजकुमार पटेल ने बताया कि ताजमहल के तहखाने में हमने संरक्षण का काम किया, उसे न्यूज लेटर में जगह दी गई और उसे वेबसाइट पर सार्वजनिक किया गया है। कोई भी इसे देख सकता है। समय-समय पर इनका संरक्षण करते हैं। संरक्षण से पहले और बाद में क्या स्थिति है, इसे दिखाया गया है।
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ऐसे दिखते हैं ताजमहल के कमरे - फोटो : अमर उजाला
बता दें ताजमहल के 20 कमरों को खोलने की याचिका को हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बृहस्पतिवार को खारिज कर दिया। कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए याचिकाकर्ता से कहा कि जनहित याचिका की व्यवस्था का मजाक मत बनाइए। यह याचिका अयोध्या के भाजपा नेता ने दायर की थी, जिसमें ताजमहल के तहखाने में बने 20 कमरों को खुलवाने की मांग की गई थी।

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ताजमहल के पीछे बहती यमुना - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और देश के नामी गिरामी संस्थानों के लिए तहखाना कई बार खुला है। ताजमहल की मजबूती परखने के लिए समय-समय पर तहखाने में जाकर इसका सर्वे किया गया है। एएसआई ने 16 साल पहले तहखाने का संरक्षण कराया था, लेकिन इसकी मजबूती परखने के लिए नेशनल जियोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट और रुड़की विश्वविद्यालय ने वर्ष 1993 में सर्वे कराया था।
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ताजमहल के पीछे बहती यमुना - फोटो : अमर उजाला
इस सर्वे में ताजमहल के तहखाने की दीवार तीन मीटर मोटी बताई गई और मुख्य गुंबद पर असली कब्रों के नीचे का हिस्सा ठोस बताया गया। रुड़की विश्वविद्यालय ने इस सर्वे में इलेक्ट्रिकल, मैग्नेटिक प्रोफाइलिंग तकनीक, शीयर वेब स्टडी और ग्रेविटी एंड जियो रडार तकनीक का उपयोग किया था। 
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