आगरा में आयोजित वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम में कारीगरों और उद्यमियों को छोटी बचत से बड़ी पेंशन का महत्व समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि एनपीएस के जरिए कम निवेश से भी बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित की जा सकती है।
छोटी आमदनी से भी बड़ी बचत होगी। भविष्य सुरक्षित होगा और मासिक पेंशन मिलेगी। बूंद-बूंद से घड़ा भरेगा। जरूरत है वित्तीय साक्षरता। इस उद्देश्य से बुधवार को अमर उजाला बोनस और पेंशन फंड निधि विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने हुनरमंद हाथ, एनपीएस का साथ विषय पर वित्तीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कारीगर, हस्तशिल्पी एवं युवा लघु उद्यमी शामिल हुए। एमजी रोड स्थित होटल हॉलिडे इन होटल में हुए कार्यक्रम में पीएफआरडीए के मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम) आशीष कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) केवल निवेश नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर वृद्धावस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मात्र 250 रुपये के नियमित निवेश से लोग अपने बुढ़ापे को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकते हैं। पेंशन को एक वैकल्पिक बचत नहीं, बल्कि अनिवार्य सुरक्षा कवच के रूप में देखा जाना चाहिए। 1975 में औसत जीवन प्रत्याशा 50-55 वर्ष थी जो अब 70-75 वर्ष हो गई है। महिलाओं में यह अवधि 3-5 वर्ष और अधिक पाई जाती है। उन्होंने कहा कि महंगाई का प्रभाव बुढ़ापे में और गहरा हो जाता है। 60 वर्ष की आयु में 5,000 रुपये का मासिक व्यय, 80 वर्ष की आयु तक 20,000 रुपये तक पहुंच सकता है। जोर दिया कि निवेश से पूर्व जोखिम प्रबंधन आवश्यक है। यदि उचित बीमा सुरक्षा नहीं ली गई तो एक दुर्घटना या गंभीर बीमारी से सारी जमा पूंजी नष्ट हो सकती है।
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हुनरमंद हाथ, एनपीएस का साथ
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि पीएफआरडीए वर्तमान में 9 करोड़ अंशधारकों की 16 लाख करोड़ रुपये की निधि का प्रबंधन कर रहा है। एनपीएस में किसी भी आयु, किसी भी राशि और किसी भी समय निवेश किया जा सकता है। इसे लचीला बनाया गया है। आयु के अनुसार योजनाएं निर्धारित की गई हैं। 0 से 18 वर्ष के लिए एनपीएस वात्सल्य और 18-40 वर्ष के लिए एपीवाई जबकि 18 से 85 वर्ष के लिए एनपीएस है। खाता खोलने की प्रक्रिया सरल की गई है। मात्र 250 रुपये से खाता खोला जा सकता है और पीपीओ के माध्यम से खाता खोले जाने पर 100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। बीसी और एफपीओ को पेंशन एजेंट के रूप में अधिकृत किया गया है ताकि डिजिटल असिस्टेड जर्नी संभव हो सके। अगले वित्तीय वर्ष में 120 स्थानों पर ये कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। केसीसी धारक किसानों, ट्रैक्टर लोन खाताधारकों और एपीवाई के 5,000 रुपये वाले लाभार्थियों को प्राथमिकता से एनपीएस से जोड़ा जाएगा। किसान, मजदूर और असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोग भी आसानी से पेंशन योजना से जुड़ सकते हैं। इससे बुढ़ापे में नियमित आय का साधन मिलता है और आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
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हुनरमंद हाथ, एनपीएस का साथ
- फोटो : अमर उजाला
अनुभव किए साझा
कार्यक्रम में उपस्थित कारीगर, शिल्पियों और छोटे उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। एनपीएस से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने उन्हें सरल और व्यावहारिक तरीके से पेंशन योजना के लाभ, निवेश प्रक्रिया और दीर्घकालिक वित्तीय योजना के बारे में समझाया। इस अवसर पर शू फैक्टर्स फेडरेशन अध्यक्ष विजय सामा, शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर एसोसिएशन अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष राकेश मित्तल, पीएफआरडीए के सीजीएम आशीष कुमार, राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति के सहायक महाप्रबंधक एवं नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक विशाल आनंद, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी आदि मौजूद रहे।
क्या है एनपीएस?
एनपीएस यानी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है, जिसमें कोई भी नागरिक नियमित रूप से निवेश कर सकता है। इसमें छोटी-छोटी रकम से निवेश शुरू करके लंबे समय में बड़ी बचत तैयार की जा सकती है, जो रिटायरमेंट के बाद पेंशन के रूप में आय देती है।
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हुनरमंद हाथ, एनपीएस का साथ
- फोटो : अमर उजाला
इसलिए फायदेमंद है एनपीएस
बुढ़ापे में नियमित आय का भरोसेमंद साधन
सरकार द्वारा विनियमित और सुरक्षित योजना
कर लाभ के कारण बचत में वृद्धि
लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना
अनुशासित निवेश की आदत विकसित होती है
ऐसे खोलें एनपीएस खाता
किसी भी अधिकृत बैंक या वित्तीय संस्था में खाता खुलवा सकते हैं
आधार कार्ड और बैंक खाते की आवश्यकता
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से पंजीकरण संभव
नियमित निवेश से भविष्य के लिए पेंशन सुनिश्चित
आर्थिक सुरक्षा का मजबूत कवच
पीएफआरडीए सीजीएम आशीष कुमार का कहना है कि पीएफआरडीए अटल पेंशन योजना और नेशनल पेंशन सिस्टम का नियमन करता है और नागरिकों को बुढ़ापे में नियमित आय की सुरक्षा प्रदान करता है। इसलिए कामकाजी जीवन के दौरान छोटी-छोटी नियमित बचत करके पेंशन की योजना बनाना सम्मानजनक भविष्य सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है।
कम उम्र में निवेश, ज्यादा पेंशन का फायदा
पीएफआरडीए डीजीएम मनोज तिवारी ने कहा कि जो कारीगर युवावस्था में एनपीएस से जुड़ते हैं, उन्हें कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि) रिटर्न का अधिकतम लाभ मिलता है। छोटी बचत भी समय के साथ बढ़कर 20–30 वर्षों में एक मजबूत पेंशन कोष का रूप ले लेती है। इससे छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों को बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा और स्थिर आय का आधार मिलता है।
भविष्य की सुरक्षा के लिए जरूरी योजना
जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, आगरा विशाल आनंद ने कहा कि एनपीएस देश के छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों को सुरक्षित और स्थिर पेंशन का अवसर देता है। नाबार्ड ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों को एनपीएस से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है।
ग्रामीण आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक ऋषिकेश बनर्जी का कहना है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) छोटे उद्यमियों, कारीगरों के बुढ़ापे में नियमित आय का सुरक्षित माध्यम प्रदान करती है। जिले का बैंकिंग तंत्र नैनो इकाइयों, छोटे व्यापारियों एवं स्थानीय उद्यमियों को वित्तीय समावेशन से जोड़ते हुए उन्हें एनपीएस से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकें।
छोटे उद्यमियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की पहल
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के सहायक महाप्रबंधक स्वपन हलदर ने बताया कि एसएलबीसी के माध्यम से बैंकिंग तंत्र नैनो इकाइयों, छोटे व्यापारियों एवं कारीगरों को वित्तीय समावेशन से जोड़ते हुए उन्हें एनपीएस से जोड़ने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है, ताकि वे अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बना सकें।
आज के परिवेश में एनपीएस बेहद जरूरी
पीएफआरडीए सहायक प्रबंधक सचिन राठी ने कहा कि बदलते समय में केवल पारंपरिक आय के साधनों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। एनपीएस जैसी योजनाएं लोगों को भविष्य के लिए आर्थिक रूप से तैयार करती हैं। इससे परिवार की वित्तीय सुरक्षा मजबूत होती है और जीवन स्तर बेहतर बनता है।
क्या बोले लोग-
- शशिकांत श्रीवास्तव का कहना है कि छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों के लिए पेंशन समय की जरूरत है, एनपीएस इस दिशा में अच्छा कदम है।
- नैना ओबराय ने कहा कि छोटी बचत से बड़ा सहारा बन सकता है, एनपीएस छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों को यही अवसर देता है।
सुशीला कौशिक ने कहा कि यह योजना छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देने में मददगार साबित हो सकती है।
पूनम सोलंकी ने बतायता कि यदि जागरूकता बढ़े तो छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों एनपीएस का लाभ उठा सकते हैं।
रक्षा गुप्ता का कहना है कि एनपीएस छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों में बचत की आदत को बढ़ावा देने वाली अच्छी पहल है।
राजन गौतम ने कहा कि छोटे उद्यमियों, कारीगरों और नैनो इकाइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा जरूरी है और एनपीएस इस दिशा में अहम कदम है।