श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर दशकों से आवाज बुलंद होती रही है। यह पहला मौका है जब भगवान श्रीकृष्ण विराजमान ने अपनी जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर और बराबर में मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीकृष्ण विराजमान के कोर्ट पहुंचने के बाद जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवादों की फाइलें खंगाली जाने लगी हैं। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान ने चार संस्थाओं को प्रतिवादी बनाया है। जिनमें से दो संस्थाएं जन्मभूमि और ईदगाह ही वर्तमान में सक्रिय हैं। हालांकि इन दोनों संस्थाओं ने याचिका दायर करने वालों की भूमिका को ही नकार दिया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर दशकों से आवाज बुलंद होती रही है। यह पहला मौका है जब भगवान श्रीकृष्ण विराजमान ने अपनी जन्मभूमि को मुक्त कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने इसके लिए अपने भक्तों के माध्यम से सिविल कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि की व्यवस्थाएं संभाल रहे श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को भी पार्टी बनाया गया है। साथ ही कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद को भी प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका दायर होने के बाद सेवा संस्थान और ईदगाह कमेटी में खलबली मच गई है। दोनों संस्थाएं जमीन के मालिकाना हक की फाइलें खंगाल रही हैं।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान के बराबर में मस्जिद
- फोटो : अमर उजाला
ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद का कहना है कि ईदगाह की जमीन पर वर्षों से हमारा कब्जा है और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध हैं। जमीन को लेकर कोई विवाद नहीं है। जिन लोगों ने याचिका दायर की है, उनकी जन्मभूमि को लेकर कोई भूमिका नहीं है। दूसरी ओर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण हमारे आराध्य हैं। उनकी जन्मभूमि पर करोड़ों लोगों की आस्था है। ईदगाह समेत पूरी 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का है। ट्रस्ट का ही अंग श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान है। याचिका दायर करने वालों को कोर्ट में जवाब देंगे।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर मथुरा
- फोटो : अमर उजाला
सेवा संस्थान ने कहा- ईदगाह कमेटी का जमीन पर कोई हक नहीं, हम देते हैं टैक्स
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी का कहना है कि ईदगाह का जन्मभूमि से लगी जमीन पर कोई हक नहीं है। एक समझौते के तहत वह जमीन साल में दो बार ईद की नमाज पढ़ने के लिए मुस्लिम समाज को दी गई थी। पूरी जमीन पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का ही मालिकाना हक है, जिसका टैक्स हम जमा करते हैं।
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पहली तस्वीर श्रीकृष्ण जन्मस्थान की, दूसरी तस्वीर में नमाज अदा करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
ईदगाह कमेटी ने कहा- जमीन पर हमारा कब्जा, न्यायालय में पेश करेंगे प्रमाण
कमेटी ऑफ मैनेजमेंट ट्रस्ट शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव तनवीर अहमद का कहना है कि वर्षों से ईदगाह की जमीन पर रोजाना पांच वक्त की नमाज पढ़ी जा रही है। सभी त्योहारों पर आयोजन किए जाते हैं। समझौते के तहत ईदगाह की ओर से जाने वाली नालियां रोकी गई थीं। कुछ और व्यवस्थाएं ठीक की गई थीं। यदि जमीन का प्रमाण मांगा जाएगा तो कोर्ट में पेश कर देंगे।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि को कैमरे में किया कैद, प्रशासन रहा सतर्क
भगवान श्रीकृष्ण महाराज ने अपनी जन्मभूमि के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मामला जब मीडिया की सुर्खियां बना तो यकायक लोगों का ध्यान भी जन्मभूमि की ओर गया। फिलहाल श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए जन्मभूमि खुल गई है। इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालुुओं की संख्या भी बढ़ गई। शुक्रवार को याचिका दाखिल होने के बाद से ही प्रशासन सतर्क है। शनिवार को सुबह करीब 11 बजे श्रद्धालु मुख्य द्वार पर खड़े होकर जन्मभूमि को निहार रहे थे। इसी दौरान कुछ श्रद्धालु इस पल को कैमरों में कैद कर रहे थे। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि पिछले दो दिन से जन्मभूमि पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। कोविड-19 के नियमों का पालन कराते हुए ही मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है। उधर, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने बताया कि जन्मभूमि पर सुरक्षा को लेकर पूरी सतर्कता बरती जा रही है।