बड़े अरमानों के साथ जिस लाल को पाल-पोसकर बढ़ा किया, यह सोचकर की वह बुढ़ापे की लाठी बनेगा। लेकिन बेटा जवान हुआ और शादी हुई तो बाप को बिसरा दिया। आर्थिक अभाव के चलते वह बेटा बाप का पेट नहीं भर पाया और उसे मंदिर पर छोड़ आया।
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ओमकार का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर से उसे वृद्घाश्रम भेज दिया गया, यहां मंगलवार को बाप की मौत हो गई। पिता के शव को बेटे का इंतजार था लेकिन बेटा शव तक लेने नहीं पहुंचा। संस्कार मानव सेवा समिति ने एटा में लाकर शव का मोक्ष धाम पर विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया।
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संस्था के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
कासगंज के मोहल्ला मोहन गली कायस्थान निवासी 69 वर्षीय ओमकार पुत्र होरी लाल उम्र के सत्तरवें पड़ाव पर पहुंचे तो जैसे उन्हें समझ आया कि दुनिया बड़ी विचित्र हो गई है, जिसे बचपन से जवानी की दहलीज तक पहुंचाने में उन पर उम्र से पहले बुढ़ापा आ गया, वही लाल इस बुढ़ापे में उनकी लाठी बनने के बजाए उन्हें दगा दे देगा।
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शव का अंतिम संस्कार कराते संस्था के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
आर्थिक तंगी और पिता से मनमुटाव के चलते ओमकार का बेटा पिता को करीब सात माह पूर्व कासगंज के ही जय-जयराम मंदिर के बाहर छोड़कर चला गया। यहां वृद्घ को कुछ लोगों ने देखा तो कासगंज स्थित वृद्घाश्रम में भेज दिया, यहां मंगलवार को उनका निधन हो गया। वृद्घाश्रम से उनके घर खबर दी लेकिन बेटे ने शव लेने से इनकार कर दिया।
मौत के बाद अंतिम संस्कार कराते संस्था के सदस्य
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र अधीक्षका निशा सूर्य ने इसकी जानकारी मानव संस्कार सेवा समिति के पदाधिकारियों को दी। एटा से पहुंचे समिति के पदाधिकारी सत्य प्रकाश ठेकेदार, दीपक चौहान, रोहित जैन एंबुलेंस लेकर कागसंज पहुंचे और शव को एटा ले आए। यहां मोक्षधाम पर उसका विधि-विधान से बुधवार की सुबह अंतिम संस्कार किया। इस दौरान वृद्घाश्रम के कर्मचारी अवनीश यादव और संजय यादव भी मौजूद रहे।