सूर्यग्रहण
बताया कि 4 फरवरी 1962 को आठ ग्रह एक साथ एकत्रित हुए थे, अष्ट ग्रही योग पड़ा था। जिसके फलस्वरूप अष्टग्रही योग के बाद चीन भारत का युद्ध हुआ था वर्तमान में 6 ग्रह एकत्रित हो रहे है। दैवज्ञ आचार्य डॉ. माखनलाल चतुर्वेदी के अनुसार कंकणाकृत्य सूर्य ग्रहण मूल नक्षत्र धनुराशि पर दृष्टव्य होगा। यह ग्रहण पूरे देश में दिखेगा। बताया कि ग्रहण के समय मंत्रजाप, पाठ, परिक्रमा, भजन, कीर्तन, स्मरण आदि में व्यतीत करना चाहिए। ग्रहण के बाद दान करना बहुत अच्छा होता है।