एसएन मेडिकल कॉलेज में लापरवाही का एक और नमूना सामने आया है। मरीजों के लिए खरीदी गई एंबुलेंस स्टोर में ताले में बंद हैं। इसके उलट मरीजों के लिए खटारा एंबुलेंस इस्तेमाल में लाई जा रही है। चालकों की नियुक्ति नहीं हो पाने से इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा। चालक की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजकर अफसरों ने भी अपनी जिम्मेदारी खत्म मान ली है।
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खटारा एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
मरीजों के लिए करीब 25 लाख रुपये की दो एंबुलेंस की खरीद पिछले महीने की गई है। इनके लिए चालक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। एसएन में पहले से ही चालकों की कमी होने के कारण इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। एसएन में 16 चालक की दरकार है और तीन ही सेवारत हैं। इसमें से एक प्राचार्य वाहन चलाता है, ऐसे में एंबुलेंस के लिए दो ही चालक हैं। इमरजेंसी से रोजाना 70-90 मरीजों को विभागों में शिफ्ट किया जाता है। चालकों की कमी से मरीजों की शिफ्टिंग भी देरी से होती है।
एसएन में चालकों की कमी से दो एंबुलेंस कबाड़ हो गई हैं, एक नई एंबुलेंस धूल फांक रही है। यह तीनों ही एंबुलेंस इमरजेंसी में खड़ी हैं। लंबे समय से चालक न होने से इन एंबुलेंस का उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके चलते यह एंबुलेंस खटारा हो गई हैं।
इमरजेंसी में एक ही एंबुलेंस से मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है। पूरी तरह से खटारा हो चुकी हैं। इसमें सीटें टूटी हुई हैं, जीवन रक्षक उपकरण तक नहीं हैं। हेड लाइट तक टूटी हुई हैं।
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एसएन मेडिकल कालेज
- फोटो : अमर उजाला
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा से बातचीत
सवाल: एंबुलेंस खरीदकर ताले में बंद कर दिए हैं। इनका उपयोग क्यों नहीं हो रहा है।
जवाब: इनके लिए चालकों की नियुक्ति होनी है, शासन को चालकों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग के लिए पत्र लिखा जा चुका है।
सवाल: चालकों की कमी से दो एंबुलेंस कबाड़ हो चुकी हैं, मरीजों की शिफ्टिंग में भी देरी होती है।
जवाब: लंबे समय से चालकों की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके चलते एंबुलेंस उपयोग में नहीं आ पाईं। इनके लिए भी चालकों की मांग की है।
सवाल: खटारा एंबुलेंस से मरीज शिफ्ट किए जा रहे हैं, जीवन रक्षक उपकरण नहीं हैं, सीट टूटी हुई हैं।
जवाब: पुरानी एंबुलेंस है, इसकी मरम्मत कराने का प्रस्ताव बनाकर अगले सप्ताह तक हालत दुरुस्त करा दी जाएगी।