कासगंज में सांप्रदायिक हिंसा के बाद शहर में भले ही कर्फ्यू न लगा हो लेकिन हालात कर्फ्यू जैसे ही रहे। 26 जनवरी के घटनाक्रम के बाद से सभी बाजार बंद रहे। दुकानों पर ताले लटके रहे। बाजारों में दूर तक सन्नाटा रहा। अपर पुलिस महानिदेशक अजय आनंद और मंडलायुक्त सुभाष शर्मा के फ्लैग मार्च के बाद तीसरे दिन दोपहर बाद कुछ बाजार जरूर खुले।
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दुकानें रहीं बंद
- फोटो : अमर उजाला
गणतंत्र दिवस के मौके पर शुक्रवार को निकाली गई तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदाय के लोगों में संघर्ष हो गया था। फायरिंग में युवक अभिषेक उर्फ चंदन गुप्ता की मौत हो गई। इसके बाद भड़की सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई। शनिवार को भी उपद्रव नहीं थमा। कई दुकानें और वाहन फूंक दिए। लगातार हुई घटनाओं से डरे व्यापारियों ने अपनी दुकानें नहीं खोलीं।
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पुलिसकर्मियों के बूटों से टूटा सन्नाटा
- फोटो : अमर उजाला
नदरई गेट बाजार, बिलराम गेट बाजार, सोरों गेट बाजार और सहावर गेट बाजार पूरी तरह से बंद रहे। बाजारों में कर्फ्यू जैसी स्थिति थी। बाजारों में काफी पुलिस बल तैनात रहा। यहां का सन्नाटा पुलिसकर्मियों के बूटों की आवाज से ही टूट रहा था। इसके बावजूद दुकानों के शटर नहीं उठे।
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एटीएम तक बंद रहे
- फोटो : अमर उजाला
नदरई गेट बाजार के दुकानदार संजय अग्रवाल का कहना है कि दो दिन बाजार बंद रहने के बाद रविवार सुबह कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें खोलने की कोशिश की थी लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें खदेड़ दिया। इसमें कुछ बुजुर्ग दुकानदार भी शामिल थे। इससे व्यापारियों में आक्रोश रहा। उन्होंने पुलिस-प्रशासन पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था का बंदोबस्त न करने का आरोप लगाया।
रविवार दोपहर नगर पालिका परिषद के कार्यालय में शांति कमेटी की बैठक के बाद एडीजी और मंडलायुक्त ने आरएएफ और पीएसी के दल बल के साथ शहर में फ्लैग मार्च किया। साथ ही दुकानदारों से दुकानें खोलने की अपील की। इस पर दोपहर चार बजे के बाद कुछ दुकानें जरूर खुल गईं। मगर, दहशत के चलते अधिकांश बाजारों में देर रात तक सन्नाटा पसरा रहा।