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कासगंज बवालः हिंसा की लपटों में मुर्दे भी बेचैन, 16 घंटे बाद नसीब हुई चिता की आग

Mon, 29 Jan 2018 02:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला कासगंज
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अंत्येष्टि का सामान ले जाते - फोटो : अमर उजाला
कासगंज ‌में फैली हिंसा की चिंगारी एक-एक कर शोलों को भड़का रही है। ऐसे में दहशत का आलम ये है जिंदा तो ‌जिंदा मुर्दों को भी सुकून नहीं रहा है। कासगंज में शनिवार को मृत एक महिला का 16 घंटे बाद अंतिम संस्कार किया जा सका।
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अंत्येष्टि के ‌ल‌िए जाते हुए - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि गंगा देवी के अंतिम संस्कार के लिए परिवारीजनों को सामान जुटाने के लिए जहमत करनी पड़ी। मोहल्ले के एक परिचित से दुकान खुलवाकर सामान का बंदोबस्त किया गया। 
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अंत्येष्टि - फोटो : अमर उजाला
पुलिस की कदमताल और तनाव पूर्ण माहौल को देखते हुए परिचितों ने भी बमुश्किल सामान देने की हिम्मत जुटाई। गंगा देवी का निधन शनिवार शाम को छह बजे हुआ लेकिन अंतिम संस्कार 16 घंटे बाद रविवार दोपहर को किया जा सका।

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पुलिस - फोटो : अमर उजाला
बाजार बंद होने से शहरवासी दूध और दवा तक को तरस गए। रविवार सुबह घने कोहरे के बाद सुबह लगभग 11 बजे जब लोग घरों से बाहर दूध लेने निकले तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें खदेड़ दिया। कुछ लोगों को काफी भटकने के बाद के बाद भी दुकानें बंद होने के कारण दूध नहीं मिल सका। 
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मेड‌िकल से दवा खरीदते हुए - फोटो : अमर उजाला
यही हाल दवा की दुकानों का रहा। हालांकि पुलिस-प्रशासन ने कुछ केमिस्टों को दुकान खोलने के लिए कहा लेकिन डर की वजह से उन्होंने दुकानें नहीं खोली। इसकी वजह से तीमारदार दवाओं के लिए शहरभर में भटकते रहे। 
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कासगंज में बंदर सब्‍जी उजाड़ते हुए - फोटो : अमर उजाला
पुलिसकर्मियों ने रविवार सुबह भी सब्जी की दुकानें नहीं खुलने दीं। विक्रेताओं की तमाम सब्जी खुले में पड़ी रही। ऐसे में यहां बंदरों का जमघट लग गया। हजारों रुपये की सब्जी बर्बाद कर दी। हालांकि दोपहर में कुछ देर के लिए थोड़ी नरमी दिखी तो सब्जी खरीदारों की लाइन लग गई।
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