मथुरा में शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में द्वापरयुगीन आभा दिखाई दी। शरद पूर्णिमा महोत्सव में ब्रज के ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद ठाकुर केशवदेव ने चंद्रलोक में छप्पन भोग के बीच विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। उधर, गोवर्धन के पारासौली स्थित चंद्र सरोवर पर धवल चांदनी में शरदोत्सव मनाया गया। राधाकृष्ण और गोपियों के स्वरूपों ने महारास किया। वृंदावन-बरसाना में भी शरद पूर्णिमा पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए।
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ठाकुरजी को अर्पित किए छप्पन भोग
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के तत्वावधान में परंपरागत रूप से शनिवार प्रात: 8:30 बजे संस्थान प्रांगण में स्थित गोशाला में गायों को माला पहनाकर पूजन किया गया। इसके बाद श्रीगिरिराज जी का पंचगव्य महाभिषेक किया गया। दोपहर 12 बजे से अन्नक्षेत्र में साधु सेवा हुई। सायंकाल पांच बजे से श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रांगण में स्थित श्रीगिरिराज पर्वत के पुण्य श्रीविग्रह के समक्ष छप्पन भोग प्रसाद अर्पित किया गया।
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चंद्रलोक में विराजे केशवदेव महाराज
- फोटो : अमर उजाला
शाम को जन्मस्थान स्थित श्रीकेशवदेव मंदिर को शरद पूर्णिमा के अवसर पर भव्य चन्द्रलोक में सजाया गया, जिसमें ठाकुरजी ने विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। इस दौरान जन्मस्थान परिसर गिरिराज जी के जयकारों-भजन कीर्तन से गूंज उठा। शरद महोत्सव का समापन रात 9:30 बजे श्रीकृष्ण चबूतरा पर शरद की धवल चांदनी में विराजमान हुए श्रीराधाकृष्ण स्वरूपों की महाशयन आरती के साथ हुआ। सभी कार्यक्रम कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए आयोजित हुए।
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दीयों की रोशनी से जगमगाता चंद्र सरोवर
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन के पारासौली स्थित चंद्र सरोवर पर शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में मनाए गए दो दिवसीय शरदोत्सव में द्वापरयुगीन आभा दिखाई दी। महारास चबूतरे पर गोपी-गीत, पद गायन अमृत रूपी चंद्र सरोवर की जल तरंगों से लौट कर ऐसे गूंज रहे थे कि साक्षात श्रीकृष्ण देवलोक से उतर कर राधा और गोपियों के साथ महारास कर ब्रजवासियों को दर्शन दे रहे हों। इस दौरान हजारों दीपों की रोशनी से चंद्र सरोवर जगमगा उठा।
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गिरिराजजी को अर्पित किए गए छप्पन भोग
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन में गिरिराज महाराज की तलहटी के मंदिरों में चन्द्रमा की धवल चांदनी में खीर का भोग लगाया। गिरिराजजी प्रभु सफेद पोशाक, स्वर्ण और रजत जड़ित आभूषणों में अनुपम छटा के बीच नजर आए। मुकुट मुखारविंद मंदिर मानसी गंगा पर गिरिराज जी का श्वेत पोशाक व आभूषणों के बीच श्रृंगार किया गया। भक्तों ने मानसी गंगा पर दीपदान किया।
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बरसाना में हुई नौका विहार लीला
- फोटो : अमर उजाला
बरसाना में राधारानी की माता कीरत की तपोभूमि सैकड़ों वर्षों से विलुप्त थी। इस विलुप्त प्राचीन कुंड एवं रास मंडल को पद्मश्री रमेश बाबा के अनुयायियों ने खोज निकाला था। शनिवार को राधा-कृष्ण की बाल लीलाओं में से एक नौका विहार लीला हुई। इसके दर्शन कर श्रद्धालु झूम उठे। राधा-कृष्ण के जयघोष से पाडर वन गुंजायमान हो उठा।
शरद पूर्णिमा पर शनिवार को वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। मंदिर के बाहर और अंदर भी दर्शन के लिए भक्त आतुर नजर आए। अन्य मंदिरों में भी शनिवार की सुबह से भक्तों की संख्या में भारी इजाफा देखने को मिला। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रबंधन और पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ ऑनलाइन व्यवस्था को भी पूरी तरह ध्वस्त करते हुए नजर आई।