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लोगों के सिर चढ़कर बोला सांझी कला का जादू, जानिए इस अनोखी परंपरा के बारे में

Mon, 16 Sep 2019 04:51 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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यमुना कला - फोटो : अमर उजाला
मथुरा में ब्रज फाउंडेशन व ब्रज संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित ब्रह्मकुंड पर चल रहे सांझी मेले का आकर्षण सिर चढ़ कर बोला। मेले के दूसरे दिन रविवार को सांझी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कलाकारों द्वारा बनायीं गई सुंदर सांझी ने लोगों को बरबस ही अपनी ओर खींचा। प्रतियोगिता में 45 प्रतिभागियों ने कला का प्रदर्शन किया। 
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सांझी कलाकृति - फोटो : अमर उजाला
भाजपा नेता पंडित उदयन शर्मा ने कहा कि इस सांझी मेले का उद्देश्य बालकों के मन में सांझी कला के प्रति लगाव पैदा करने का है। ब्रज संस्कृति शोध संस्थान के सचिव लक्ष्मी नारायण तिवारी ने कहा कि पौराणिक महत्व के इस स्थल को लोगों ने भुला दिया था। फाउंडेशन के सहयोग से 2015 से इस सांझी मेले का आयोजन करना प्रारंभ किया। 
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सांझी कलाकृति - फोटो : अमर उजाला
ब्रज की सांझी कला पर कई शोधार्थी शोध कर रहे हैं। गुजराज के बड़ौदा की शोध छात्रा सांझी के बारे मे तथ्य जुटाने मेले में पहुंचीं। सयाजीराव गायकवाड़ विश्वविद्यालय में एम.फिल की छात्रा साक्षी ने न सिर्फ सांझी कलाकारों से बात कर इस कला की बारीकियों को समझने का प्रयास किया। परंपरा के अनुसार श्रद्ध पक्ष में राधारानी ने गाय के गोबर से सांझी बनाकर उसे सांझी देवी का रुप दिया है। यह राधारानी का सबसे प्रिय खेल है। 

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सांझी कलाकृति - फोटो : अमर उजाला
ब्रज के कलाकार संजय सोनी ने सांझी कला की परंपरा बनाये रखने के साथ-साथ नये अभिनव प्रयोग भी किये। प्रयाग घाट मथुरा निवासी संजय सोनी सांझी बनाने के साथ सांझी के स्टेंसिल भी बनाते हैं। जडिया घराने के नाम से विख्यात संजय के परबाबा भैरोमल जडिया ने रंगजी के मंदिर में स्थित सोने के खंभे पर सोना जड़ने का कार्य किया था। 
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कलाकारों द्वारा बनाई गई खूबसूरत कलाकृति - फोटो : अमर उजाला
आठ वर्ष की अवस्था से ही संजय ने इस कला को अपनाया। आज संजय का नाम इस कला के विख्यात कलाकारों में लिया जाता है। संजय जल सांझी, फूल सांझी व सूखे रंग की सांझी को बड़ी कुशलता के साथ बनाते है। स्थानीय निवासी विश्वजीत दास की बचपन से ही चित्रकला में रुचि रही। देवालयों में बनने वाली सांझी को देखकर वह भी इस कला को सीखना चाहते थे। 
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