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Republic Day 2020: ये हैं आगरा में 'गणतंत्र' के पहरुए, जो कर रहे नेक काम...इन्हें सलाम

Mon, 27 Jan 2020 09:31 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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'गणतंत्र' के पहरुए - फोटो : अमर उजाला
तंत्र को गणतंत्र बनाने में उनके नागरिकों का योगदान अहम होता है। गणतंत्र के ये पहरुए देश ही नहीं समाज के विकास के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं। आगरा में हृदेश चौधरी घुमंतू परिवारों के बच्चों के बीच शिक्षा का उजाला फैला रही हैं तो नरेश पारस और ऋतु वर्मा पीड़ित बच्चों और युवतियों को 'एक और मौका' उपलब्ध करा रही हैं। श्याम सिंह चाहर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम चला रखी है। शहर में और भी गणतंत्र के पहरुए हैं। 71 वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर शहर के इन पांच 'पारस' पर रिपोर्ट...।
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हृदेश चौधरी - फोटो : अमर उजाला
घुमंतू परिवारों के 250 बच्चों को दिला रहीं शिक्षा
डॉ. हृदेश चौधरी शिक्षा का उजाला फैला रही हैं। घुमंतू परिवारों के बच्चों के लिए उन्होंने स्कूल खोला है। इसमें 250 बच्चे पढ़ रहे हैं। 2013 में यह घुमंतू विद्यालय खोला गया था। उनकी संस्था आराधना में 200 सदस्य हैं, सभी विद्यालय की गतिविधियों में मदद करते हैं। विद्यालय में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

डॉ हृदेश चौधरी ने बताया कि सड़क के किनारे डेरा डाले परिवारों के बच्चों की हालत देखकर दुख हुआ। उनकी जिंदगी में बदलाव शिक्षा से ही संभव है, इस विचार के साथ विद्यालय शुरू किया। 
 
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किसान नेता श्याम सिंह चाहर - फोटो : अमर उजाला
नहर-सिंचाई विभाग में घोटाला किया उजागर
श्याम सिंह चाहर किसानों का हक मारने वाले अफसरों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने नहर, सिंचाई विभाग के घोटालों को उजागर कर दोषी अफसरों पर मुकदमा दर्ज कराने में अहम भूमिका निभाई। किसानों की बीज, खाद, पानी, घुमंतू पशुओं जैसी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय हैं। इनररिंग जमीन घोटाले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। 

किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने कहा कि सरकारी योजनाओं में घोटाले के खिलाफ 2012 में संघर्ष शुरू किया था। यह जारी है। जन-जन की आवाज नाम से संगठन बनाकर किसानों की मदद कर रहा हूं।

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आरटीआई कार्यकर्ता नरेश पारस - फोटो : अमर उजाला
50 युवतियों को दी ‘नई जिंदगी’
नगला अजीता निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नरेश पारस अभी तक 50 से अधिक युवतियों को देह व्यापार के अड्डों से मुक्त करा चुके हैं। 230 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवार से मिला चुके हैं। भिक्षावृत्ति करने वाले 43 बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिला चुके हैं। आरटीआई के माध्यम से सूचना एकत्र कर पीड़ितों की मदद करते हैं। महफूज संस्था से जुड़े हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता नरेश पारस ने बताया कि 2007 में नारी निकेतन में युवती को बिना किसी दोष के कैद होने की जानकारी मिली। उसे मुक्त कराया। बच्चों और पीड़ित युवतियों के लिए मुहिम जारी रखूंगा।
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ऋतु वर्मा - फोटो : अमर उजाला
2000 बच्चों को परिवार से मिलाया
ऋतु वर्मा आठ साल से चाइल्ड लाइन एनजीओ से जुड़ी हैं। वह यहां समन्वयक हैं। वह करीब 2000 गुमशुदा बच्चों को उनके परिवार से मिला चुकी हैं। पुलिस की मदद से 150 बाल विवाह रुकवाए हैं। एमए, बीएड के साथ ही मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्रीधारक ऋतु ने ऐसे मामलों में 25 से ज्यादा मुकदमे दर्ज कराए हैं। 

ऋतु वर्मा का कहना है कि मुहिम को आगे बढ़ाना है। बच्चियों के साथ होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता लाना मकसद है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’अभियान चला रही हूं।
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कांस्टेबल सचिन कौशिक - फोटो : अमर उजाला
सेवा कर पुलिस की छवि बदल रहे
राजकीय रेलवे पुलिस में तैनात कांस्टेबल सचिन कौशिक आम लोगों में पुलिस की छवि को बदल रहे हैं। ट्रेनों में सफर के दौरान बीमार यात्रियों की मदद करते हैं। एक्सीडेंट में घायल होने वाले यात्रियों को रक्त देने वालों में उनका नाम पहला होता है। एसपी जीआरपी के पीआरओ  सचिन ने पुलिस के कार्यों पर फेसबुक पेज भी बनाया है। एससी आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामशंकर कठेरिया, प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने उनको सम्मानित किया। 

सचिन कौशिक ने कहा कि पुलिस लोगों की मित्र है, यह आम लोगों को समझाना होगा। मेरे प्रयास का असर भी पड़ा है। अब लोग मदद मांगने में हिचकते नहीं हैं। वे लोग पुलिस के अच्छे कार्यों को मुझे बताते भी हैं।
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