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शहादत को सलाम: लोग बोले- जिंदादिल-जोशीला और जांबाज था हमारा पृथ्वी, शहीद को याद कर भावुक हुए रिश्तेदार

Sat, 11 Dec 2021 10:54 AM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
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शहीद को श्रद्धांजलि देते लोग - फोटो : अमर उजाला
हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए आगरा के विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान जिंदादिली, जोशीलापन और जांबाजी की मिसाल थे। वह जब छुट्टी पर घर आते थे लंबी ड्राइव पर निकल जाते थे। वह पूरे फैमिली मैन थे। उनकी सादगी, बुद्धिमत्ता और बहादुरी का हर कोई कायल था। उनके रिश्तेदार, पड़ोसी और कुछ चुनिंदा दोस्तों के पास उनसे जुड़े अनूठे किस्से हैं, जिन्हें याद कर वो भावुक हो जाते हैं। 

अमर उजाला से बातचीत के दौरान उन्होंने इनमें से कुछ किस्से साझा भी किए। लोगों ने बताया कि पृथ्वी सिंह खुशमिजाज इंसान थे। जीवन को खुल कर जीते थे। जोश से भरे हुए जांबाज थे। परिवार को साथ लेकर घूमना ही उन्हें अच्छा लगता था। नई जगहों पर जाना पसंद था। उस जगह के बारे में जानकारी जुटाना और फिर परिवार के लोगों से साझा करना उन्हें अच्छा लगता था।



अच्छे फोटोग्राफर भी थे पृथ्वी 
शहीद पृथ्वी सिंह को फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था। पड़ोसी राजेश सिंह ने बताया कि रील वाले कैमरे से एक ही क्लिक में अच्छी तस्वीर खींच लेते थे। जब भी छुट्टी पर घर आते थे तो सुबह जल्दी उठ कर अक्सर ही तस्वीरें खींचने निकल जाते थे। यह शौक उन्हें अपने स्कूली दिनों से लगा था। 
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शहीद विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान - फोटो : अमर उजाला
खोलनी थी फ्लाइंग एकेडमी 
पृथ्वी सिंह के एक दोस्त प्राइवेट एयरलाइंस में नौकरी करते हैं। दोनों के बीच अयोध्या, रीवा या आगरा के आसपास फ्लाइंग एकेडमी खोलने को लेकर प्लानिंग बन रही थी। जमीन भी तलाशी जा रही थी। रिटायरमेंट के बाद पृथ्वी एकेडमी का संचालन करना चाहते थे।
 
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विंग कमांडर के स्कूल के समय की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
'जानवरों को देते थे खाना, पाल रखा था उल्लू' 
पृथ्वी सिंह के रिश्तेदार पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें जानवरों से बेहद लगाव था। आगरा जब भी आते थे तो गली में लावारिस कुत्तों और घर के सामने से गुजरते मवेशियों को कुछ न कुछ खाने को जरूर देते थे। रीवा के सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान उन्हें एक पेड़ के नीचे घायल अवस्था में उल्लू पड़ा मिला। वे उसे अपने साथ हॉस्टल ले आए। उसे दवा दी और कुछ दिनों तक अपने पास रखा भी था। 

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शहीद विंग कमांडर के रिश्तेदार - फोटो : अमर उजाला
'साइकिल  पर बैठाकर घुमाते थे'
शहीद के मामा रमेश सिंह ने बताया कि बचपन में साइकिल पर बैठा कर कई बार उन्हें घुमाया था। उनकी शहादत से परिवार का सर गर्व से ऊंचा है लेकिन दिल में अजीब सा दर्द भी है। बहुत कम उम्र में ही वे सबको छोड़ कर चले गए। अपने बच्चों के लिए उन्होंने तमाम सपने देखे थे। परिवार की समझ में नहीं आ रहा कि यह क्या हो गया। 
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विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
'हमउम्र थे, गर्मजोशी से मिलते थे' 
मौसा मनेंद्र जादौन ने कहा कि रिश्ते में उनसे बड़ा था लेकिन वे हमउम्र ही थे। आगरा आगमन पर मुलाकात होती थी। जब भी मिलते थे, बेहद गर्मजोशी के साथ। उनका असमय जाना परिवार को असनीय दर्द दे गया है। रिश्तेदारों के चहेते थे। हर किसी से आत्मीयता के साथ बातचीत करते थे। पड़ोसी भी उनकी बहुत तारीफ करते हैं। 
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