ताजनगरी में पर्यटकों को ‘छपाक’ की दस ‘मालती’ व्यंजन परोस रही हैं। जिंदगी की खौफनाक त्रासदी से जूझने के बाद भी यह मालती स्वयं को आत्मनिर्भर बना रही हैं। 10 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘छपाक’ में एसिड अटैक पीड़िता मालती का किरदार निभाने वाली फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने रील लाइफ में जो किरदार निभाया है, शहर में रहने वाली दस मालती ऐसा किरदार अपनी रीयल लाइफ में जी रही हैं। एसिड अटैक पीड़िता शबनम ने जहां इस त्रासदी को झेलने के बाद पढ़ने की ठानी, वहीं डॉली ने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। इन युवतियों का मानना है 10 जनवरी को आने वाली फिल्म एसिड अटैक पीड़ितों की आवाज बनेगी। इस फिल्म को देखने के बाद सरकार को भी सिस्टम के झोल की जानकारी मिल सकेगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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एसिड हमले की पीड़िता सरवाइवर अलीगढ़ की रहने वाली शबनम
- फोटो : अमर उजाला
एसिड अटैक सरवाइवर अलीगढ़ की रहने वाली शबनम इन दिनों शीरोज में भोजन के लिए आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों को भोजन परोसने का काम कर रही हैं। इसके साथ ही शबनम ने अपने साथ हुई खौफनाक घटना के बाद स्वयं को शिक्षित करने का फैसला लिया। तीन साल पहले एक ठेकेदार ने उनके चेहरे पर तेजाब फेंका था।
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एसिड हमले की पीड़िता डॉली
- फोटो : अमर उजाला
शीरोज में काम करने वाली डॉली उन खौफनाक पलों को याद कर सिहर उठती हैं। वह बताती हैं कि इस घटना के बाद उन्होंने स्वयं को संभालने का संकल्प लिया। शीरोज में काम करना शुरू कर दिया। आत्मनिर्भर बन सुकून मिलता है। पढ़ाई के लिए जाते समय डॉली के ऊपर उन्हीं के पड़ोस में रहने वाले युवक ने तेजाब फेंका था। अभियुक्त सलाखों के पीछे हैं।
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एसिड हमले की पीड़िता रूपा
- फोटो : अमर उजाला
रूपा की सौतेली मां ने पांच साल पहले उनके चेहरे पर तेजाब फेंका था। इससे पहले कई बार घर में झगड़ते होते थे। हर बार चेहरे पर तेजाब फेंकने की धमकी दी जाती थी। एक दिन सच में मेरे चेहरे पर तेजाब फेंक दिया गया। आज भी मुझे यकीन नहीं होता कि एक सौतेली मां भी ऐसा करने की सोच सकती है। ये फिल्म भी समाज को नया आइना दिखाएगी।
रीच ऑउट एंड वेलफेयर की ओर से पांच प्रदेशों में 100 एसिड अटैक पीड़ितों पर सर्वे किया गया। आगरा में शीरोज का काम देख रहे और छांव फाउंडेशन के निदेशक आशीष शुक्ला ने अमर उजाला को बताया कि वेलफेयर की कई टीमों ने अभी तक सौ एसिड अटैक पीड़ितों पर सर्वे किया। इसमें पाया गया कि 69 प्रतिशत अकेले लोगों ने युवती पर तेजाब फेंका। 29 प्रतिशत मामलों में एक से अधिक लोग युवती पर एसिड अटैक में शामिल रहे, जबकि दो प्रतिशत का पता नहीं चल सका। 59 प्रतिशत अविवाहित युवतियों और 41 प्रतिशत विवाहित महिलाओं पर तेजाब फेंकने की घटना हुई। 64 प्रतिशत मामले दिन में और 36 प्रतिशत मामले रात में हुए।