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आगरा: 56 लाख रुपये की लागत से तैयार किए 28 आइसोलेशन कोच, रेलवे यार्ड में फांक रहे धूल 

Sun, 27 Mar 2022 09:23 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आगरा रेल मंडल में कोरोना काल में तैयार कराए गए 28 आइसोलेशन कोच कबाड़ होने के कगार पर हैं। 24 महीने बीते चुके हैं, लेकिन यहां के न तो ताले खुले और ना हीं धूल की परतें हट सकीं।
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आगरा: आइसोलेशन कोच में जम गई धूल - फोटो : अमर उजाला
कोरोना काल में संक्रमितों को भर्ती करने के लिए 56 लाख रुपये की लागत से तैयार किए 28 आइसोलेशन कोच अब कबाड़ होने को हैं। 24 महीने बाद भी कोचों के न ताले खुले न सीटों पर जमा धूल की मोटी परतें ही साफ की गईं। हाल ये है कि इन कोचों को आगरा कैंट के यार्ड में 500 मीटर दूर खड़ा करा दिया गया है। अब इनको देखने वाला भी कोई नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल में देखा गया कि यार्ड में खड़े बदहाल कोचों की खिड़कियों के टेप उखड़ चुके हैं। पेंट भी झड़ने लगा है। 

 
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आइसोलेश कोच की मच्छर दानी उखड़ी - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण की पहली लहर में रेलवे ने सभी डिवीजनों को आइसोलेशन कोच तैयार कराने की जिम्मेदारी दी थी, ताकि आपात स्थिति होने पर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराया जा सके। आगरा में भी कैरेज एंड वैगन (सीएंडडब्ल्यू) विभाग ने मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के पुराने कोचों में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इनमें ड्रिप चढ़ाने, ऑक्सीजन सिलिंडर रखने के साथ ही डस्टबिन की व्यवस्था की थी। नर्सिंग स्टाफ के लिए भी कक्ष बनाया गया था। एक कोच को तैयार करने में तकरीबन दो लाख रुपये का खर्च आया था। 
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ट्रेन की बोगी को बनाया गया आइसोलेशन कोच - फोटो : अमर उजाला
अप्रैल 2021 में आई संक्रमण की दूसरी लहर में जब लोगों की ऑक्सीजन की कमी से मौतें हो रही थीं। तब रेलवे प्रशासन ने इन कोचों को स्टेशन पर लाकर खड़ा कर दिया, लेकिन तब अराजक तत्वों ने इन्हें अड्डा बना लिया। इसके बाद इन्हें दोबारा से यार्ड में खड़ा करवा दिया गया। 

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रेलवे के आइसोलेशन कोच - फोटो : अमर उजाला
दूसरी लहर में गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ स्टेशनों पर ऐसे आइसोलेशन कोचों में संक्रमितों को भर्ती करके इलाज भी किया गया था, लेकिन आगरा में हॉस्पीटलों में बेड नहीं मिलने के बाद भी इनके इस्तेमाल के बारे में नहीं सोचा गया। यह कोच कबाड़ बनकर ही रह गए। 
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आइसोलेशन कोच - फोटो : अमर उजाला
संक्रमण काल में तैयार किए गए 28 आइसोलेशन कोचों का निर्माण पुराने कोचों में किया गया था। ऐसे में इन कोचों का इस्तेमाल दोबारा ट्रेनों में शायद ही हो। इन कोचों के बारे में कोई भी निर्णय रेलवे बोर्ड के निर्देश पर ही किया जाएगा। - प्रशस्ति श्रीवास्तव, वाणिज्य प्रबंधक, आगरा रेल मंडल
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