आगरा के कोठी मीना बाजार में छत्रपति शिवाजी महाराज का म्यूजियम और स्मारक बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद प्रशासन हरकत में आया है। लेखपालों की टीम बनाई गई है। यह टीम कोठी मीना बाजार की जमीन की पैमाइश कर चार दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी। इस बीच पर्यटन विभाग ने शहर के इतिहासकारों से संपर्क किया है। मामले में मंगलवार को लखनऊ में भी पर्यटन विभाग की बैठक होनी है।
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राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : amar ujala
राज्यपाल राम नाईक ने सबसे पहले शिवाजी महाराज के आगरा में नजरबंद रहने पर यहां स्मारक की इच्छा जताई थी। इसके बाद इतिहास संकलन समिति के प्रो. सुगम आनंद और डॉ. अमी आधार निडर ने छत्रपति शिवाजी महाराज ने उस हवेली की खोज की, जहां उन्हें नजरबंद रखा गया था।
उनके शोधपत्र में कोठी मीना बाजार को नजरबंद वाली हवेली बताया गया है, जो ब्रिटिश राज के दौरान तोड़कर गवर्नर हाउस में तब्दील कर दी गई थी। इससे पूर्व में चली आ रही वो मान्यता भी खत्म हो गई, जिसमें आगरा के किले में शिवाजी को नजरबंद करने का दावा किया गया था। हालांकि कथित जेल को एएसआई ने ही मान्यता नहीं दी थी।
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
डॉ. भीमराव आंबेकर विश्वविद्यलय के इतिहास विभाग के प्रो. सुगम आनंद और आगरा कॉलेज के डॉ. अमी आधार निडर ने अपने शोध पत्र में कहा है कि शिवाजी आगरा किले के दीवान ए आम में अपमान होने पर दरबार छोड़कर चले आए थे। जिसके बाद उन्हें राम सिंह की छावनी के पास नजरबंद किया गया।
उनकी निगरानी की जिम्मेदारी फौलाद खां की थी। 16 मई, 1666 को शिवाजी को रद्दाज खां के मकान पर भेजा गया। आलमगीरनामा और राजस्थानी दस्तावेजों के मुताबिक राम सिंह की जमानत पर शिवाजी को फिदाई हुसैन की हवेली में कैद किया गया। यह स्थान कोठी मीना बाजार है, जहां से वो चकमा देकर निकल गए।
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छत्रपति शिवाजी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा किले में छत्रपति शिवाजी महाराज को कैद करने की कथाओं को पुरातत्वविदों ने ही मान्यता नहीं दी है। किले में रतन सिंह की हवेली के आगे मोती मस्जिद के सामने से होकर एक रास्ता खिज्र गेट तक गया है। इसके रास्ते में मौजूद कोठरियों को शिवाजी की जेल बताया गया था। एएसआई ने उसका संरक्षण तो किया, लेकिन इसे शिवाजी की जेल की मान्यता नहीं दी।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
एसडीएम सदर अभिषेक कुमार सिंह ने बताया कि हमने जमीन की पैमाइश के लिए लेखपालों की टीम बना दी है। चार दिन में उन्हें रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मैंने मुख्यमंत्री से मांग की थी कि कोठी मीना बाजार का अधिग्रहण कर उसे शिवाजी महाराज का राष्ट्रीय स्मारक बनाया जाए। मैदान से अवैध कब्जों को हटाकर शिवाजी की विशाल प्रतिमा लगाई जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य को जान सकें।
उपनिदेशक पर्यटन अमित श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के मुताबिक आगरा में शिवाजी महाराज का म्यूजियम बनाने के लिए उन प्रमाणिक स्थलों की पड़ताल की जा रही है, जहां उन्हें नजरबंद किया गया था।