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आगरा में पुलिस पिटाई से मौत का आरोप: बेटियां चीखती रहीं, चेहरा तक नहीं दिखाया, जबरन शव ले गई पुलिस, इंसाफ की मांग

Thu, 03 Feb 2022 12:11 PM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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भगवानदास का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आगरा में मंडी सईद खां (नाला बुढ़ान सैय्यद) निवासी ऑटो चालक भगवान दास राठौर (36) की मौत के बाद पुलिस कठघरे में है। पिटाई के बाद परिजनों ने एक और आरोप लगाया गया है। बेटी मुस्कान और पत्नी अनीता का कहना है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर आने पर चेहरा तक नहीं देखने दिया। वह चीखती रह गईं, लेकिन किसी ने सुना नहीं। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़ लिया। पुलिस जबरन शव को उठाकर ले गई। रिश्तेदार तक नहीं आ सके। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। ऑटो चालक की मौत के बाद से मोहल्ले के लोगों में गम और गुस्सा है। भगवान दास राठौर की मंगलवार को संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। मामले में पत्नी अनीता ने पुलिस पर पति को थाने ले जाकर पिटाई का आरोप लगाया था। इमरजेंसी पर हंगामा हुआ था। शव ले जाने के लिए खींचतान हुई थी। परिजन राजामंडी चौराहे तक आ गए थे। पुलिस लाठियां फटकारकर शाम तकरीबन छह बजे शव को पोस्टमार्टम गृह लेकर गई थी।
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ऑटो चालक के शव के पास बिलखती बेटी - फोटो : अमर उजाला
बेटी मुस्कान ने बताया कि रात तकरीबन 11 बजे पिता के शव का पोस्टमार्टम करा दिया गया। इसके बाद बुधवार सुबह छह बजे परिजन शव घर लेकर पहुंचे। तब तक परिवार के दूरदराज में रहने वाले रिश्तेदार भी नहीं आए थे। घर के आसपास पहले से पुलिस फोर्स तैनात थी। पुलिस ने पांच मिनट बाद ही शव श्मशान घाट ले जाने की तैयारी करा दी। तब तक वो पिता का चेहरा तक नहीं देख पाई थीं। पुलिस को रोकने का प्रयास किया, लेकिन महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें कुछ नहीं करने दिया। वह बहनों और मां के साथ चीखतीं रहीं, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की। पुलिस ने पहले पिता को पीटकर मार दिया, अब सम्मान के साथ अंतिम संस्कार भी नहीं करने दिया। श्मशान घाट पर कुछ रिश्तेदार और भाई को ले जाकर खुद ही अंतिम संस्कार करा दिया। वह मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगाएंगी।
 
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आगरा: एसपी सिटी विकास कुमार - फोटो : अमर उजाला
आरोपों की कराई जाएगी जांच 
एसपी सिटी विकास कुमार ने बताया कि मामले में जांच की गई। घटना का सीसीटीवी फुटेज है। पिटाई के आरोप गलत हैं। अगर, परिजन शव ले जाने में पुलिस पर जल्दबाजी करने का आरोप लगा रहे हैं तो जांच कराई जाएगी। अभी किसी तरह की शिकायत नहीं आई है।

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हरीपर्वत पुलिस स्टेशन आगरा
लोगों में आक्रोश, फोर्स रही तैनात
पुलिस के रवैये के प्रति परिवार ही नहीं, मोहल्ले के लोगों में भी आक्रोश है। यही वजह थी कि मोहल्ले के बाहर फोर्स तैनात रही। पुलिस परिजनों के सड़क से हटने के बाद ही गई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण अस्पष्ट, विसरा सुरक्षित
सीओ हरीपर्वत एएसपी सत्य नारायन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है। इसमें मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। शरीर पर किसी तरह की चोट भी नहीं लगी है। विसरा सुरक्षित रखा गया है। इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इसकी रिपोर्ट जल्द मंगाई जाएगी।
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ऑटो चालक की मौत का मामला - फोटो : अमर उजाला
सवाल : ... क्या जल्द आएगी विसरा की रिपोर्ट
परिजनों ने पुलिस पर भगवान दास की पिटाई का आरोप लगाया था। उनके हाथों पर खरोंच और सीने पर डंडा मारने के निशान भी दिखाए थे। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। जानकारों का कहना है कि विसरा की जांच रिपोर्ट जल्द आना आसान नहीं है। ऐसे में तब तक भगवान दास की मौत का कारण सवाल ही बना रहेगा।
सवाल : पुलिस ने क्यों दिखाई अंतिम संस्कार में जल्दबाजी?
परिजनों का आरोप है कि अगर, पुलिस ने पिटाई नहीं की थी तो पोस्टमार्टम रात में ही क्यों कराया। इसके बाद शव लेकर आने पर भी पुलिस घर पहुंच गई। जबरन शव क्यों उठा ले गई? अंतिम संस्कार कराने में भी पुलिस ने इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई।
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आरटीआई कार्यकर्ता नरेश पारस - फोटो : अमर उजाला
मानवाधिकार कार्यकर्ता बोले, मानवाधिकारों को हनन किया गया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस ने बताया कि अंतिम संस्कार रीति-रिवाज से करना परिजनों का अधिकार है। यह मानवाधिकार में भी आता है। अगर, अंतिम संस्कार में कोई जल्दबाजी और दखलअंदाजी करता है तो यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है। ऑटो चालक की मौत के मामले में अगर, ऐसा हुआ है तो परिजनों की शिकायत को मानवाधिकार आयोग में ले जाएंगे।
बिना वर्दी के पुलिस वाले परिवार को समझाते रहे
परिवार वाले घटिया मार्ग पर सड़क पर बैठे थे। महिलाएं उठने के लिए तैयार नहीं थीं। वह इंसाफ की मांग कर रही थीं। इस दौरान पुलिसकर्मी समझाने के प्रयास कर रहे थे। बिना वर्दी के पुलिस वाले भी मौजूद थे। परिजनों का कहना था कि कुछ पुलिसकर्मी उन्हें उठने की कह रहे थे। यह भी कहा कि नौकरी लगवा दी जाएगी। प्रदर्शन और आरोप लगाने से कोई फायदा नहीं होने वाला है।
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शव के पास रोती ऑटो चालक की छोटी बेटी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
भगवान दास ने गिरवी रखा था मकान, परिवार पर आर्थिक संकट
बेटी मुस्कान ने बताया कि वह चार बहन और एक भाई हैं। बहनें स्कूल जाती हैं। पिता ऑटो चलाकर घर का खर्च चला रहे थे। छह साल पहले छोटी बहन डॉली बीमार हो गई थी। उसका ऑपरेशन कराना पड़ा था। तब मकान को गिरवी रख दिया था। उन पर डेढ़ लाख रुपये का कर्ज है। पिता की मौत के बाद अब कोई सहारा नहीं है। मां बेहाल हैं। उनके आंसू नहीं रुक रहे हैं। परिवार को प्रशासन की तरफ से कोई आर्थिक मदद नहीं दी गई है। कोई नेता भी मदद के लिए आगे नहीं आया। घर में अब कोई कमाने वाला नहीं है।

 
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थाना जगदीशपुरा - फोटो : अमर उजाला
पुलिस पर कई बार लगे पिटाई के आरोप
दो महीने पहले थाना जगदीशपुरा पुलिस की हिरासत में एक सफाईकर्मी की मौत हो गई थी। इस मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया गया। इसमें आज तक विवेचना चल रही है। मुकदमे में आरोपियों के नाम तक नहीं खोले गए। इससे पहले कोरोना काल में घर के बाहर पुलिसकर्मियों ने व्यापारी को पीटा था। मामले में सिपाहियों पर कार्रवाई की गई थी। दो साल पहले जीवनी मंडी में घर में घुसकर महिलाओं से अभद्रता और मारपीट के आरोपी दरोगा पर लगे थे। सिकंदरा पुलिस की हिरासत में भी युवक की मौत हुई थी।
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