शहर में खटारा वैनों को एंबुलेंस बनाकर दौड़ाया जा रहा है। राजस्थान और मध्य प्रदेश की 1500 एंबुलेंस एसएन मेडिकल कॉलेज से लेकर प्राइवेट अस्पतालों तक मरीजों को लाने जाने के कार्य में लगी हुई हैं। जीवन रक्षक उपकरणों के नाम पर इनमें ऑक्सीजन सिलिंडर, फर्स्ट एड किट तक नहीं हैं। पेश है अमर उजाला की रिपोर्ट...
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इमरजेंसी के बाहर खड़ी एंबुलेंस
- फोटो : अमर उजाला
यमुनापार के अस्पतालों में राजस्थान और मध्य प्रदेश की एंबुलेंस से मरीजों को भर्ती कराने का सिलसिला बंद नहीं हो सका है। यहां 16 निजी अस्पतालों के संचालकों की एंबुलेंस वालों से ही सेटिंग है। वह मरीजों को भर्ती कराने का कमीशन ले रहे हैं। यही हाल अब सिकंदरा और बाग फरजाना के अस्पतालों में हो रहा है। इन अस्पतालों के बाहर भी बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड एंबुलेंस खड़ी दिखाई देती हैं। शहर में भी ऐसी खटारा वैन एंबुलेंस बनाकर चलाई जा रही हैं। एसएन अस्पताल के बाहर खड़ी एक एंबुलेंस में आक्सीजन सिलिंडर नदारद था। किसी में फर्स्ट एड किट तक नहीं होती है। सीटें तक फटी हुई हैं। एत्मादपुर के राधेश्याम ने बताया कि एंबुलेंस चालक ने उनके रिश्तेदार को एत्मादपुर से यमुना पार तक लाने के लिए 500 रुपये वसूल किए।
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परिवहन विभाग ने एंबुलेंस को सीज किया
- फोटो : अमर उजाला
दूसरे राज्यों की मानकों को ताक पर रखकर संचालित एंबुलेंस के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग और परिवहन विभाग के प्रवर्तन दलों ने अभियान चलाया था। इस दौरान जीवन रक्षक उपकरण, अपंजीकृत और दूसरे राज्यों में पंजीकृत एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। 73 एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इसके बाद से संयुक्त अभियान नहीं चलाया गया है। यही कारण है कि दोबारा से इन एंबुलेंस की संख्या में इजाफा हो गया है।
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चेकिंग के दौरान स्वास्थ्य और परिवहन विभाग के अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
राजस्थान की डग्गेमार 100 से ज्यादा एंबुलेंस शहर के अंदर चल रही हैं। हमने कई बार संभागीय परिवहन विभाग में आरटीओ को इन एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई करने को ज्ञापन दिया है, लेकिन इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही है। एमपी की एंबुलेंस भी यहां दौड़ रही हैं। -रवि सिसौदिया, प्रदेश सचिव, एंबुलेंस ऑनर चालक एसोसिएशन
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एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा
- फोटो : अमर उजाला
एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी के बाहर फिर से बाहरी राज्यों की एंबुलेंस का जमावड़ा लगने लगा है। यहां राजस्थान और मध्य प्रदेश की एंबुलेंस खड़ी होने लगी है। पूर्व में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इन एंबुलेंस को हटवाया दिया था, लेकिन रविवार को यहां दूसरे आठ एंबुलेंस खड़ी थीं। इनमें चालक 24 घंटे बैठता है ताकि मरीज के आने पर तुरंत अपने खास अस्पताल ले जाया जा सके।
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संभागीय परिवहन कार्यालय आगरा
एंबुलेंस के खिलाफ अभियान बंद नहीं किया है। जनवरी में भी दो एंबुलेंस के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। अब स्वास्थ्य विभाग के साथ रूपरेखा तैयार करेंगे। यह सही है कि यहां बाहरी राज्यों की एंबुलेंस चलाई जा रही हैं। -अनिल कुमार, आरटीओ (प्रवर्तन)
मानकों को ताक पर रखकर संचालित एंबुलेंस
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यह हैं मानक
- एंबुलेंस आरटीओ में पंजीकृत होनी चाहिए, आरटीओ में पंजीकरण सीएमओ से सर्टिफिकेट होने पर ही किया जाता है, एंबुलेंस में आवश्यक सुरक्षा उपकरण, जैसे स्पीड गवर्नर, फायर सेफ्टी उपकरण आदि होने चाहिए, ऑक्सीजन सिलिंडर, अंबु बैग, फर्स्ट एड किट, जरूरत होने पर नर्सिंग स्टाफ होना चाहिए।