शहर में ऑटो चालक बेलगाम हैं। तीन सवारियों के ऑटो में दस तक बिठा लेते हैं। ऑटो में डेक लगाना प्रतिबंधित है लेकिन शायद ही कोई ऑटो मिले जिसमें डेक नहीं लगा हो। ऐसा भी नहीं है कि यह छुपाकर लगाया गया है, तेज आवाज में बजाया जाता है। शिकायत पर भी कार्रवाई नहीं की जाती। दुस्साहस इतना कि महिलाओं पर भद्दे कमेंट करते हैं। शनिवार को अमर उजाला ने इस स्थिति की पड़ताल की तो बड़े चौराहों पर भी ऐसी ही स्थिति मिली।
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तीन सवारियों के स्थान पर अधिक सवारियां
- फोटो : अमर उजाला
भगवान टॉकीज चौराहा: दोपहर 1.00 बजे
स्टॉपेज नहीं है, फिर भी न्यू आगरा थाना के सामने दस ऑटो खड़े थे। दो छात्राओं को देखते ही एक ऑटो वाला बोला, इधर आओ, ये खाली है, पहले चलेगा। उनके बैठते ही तीन युवक और आ गए। छात्राएं उतरने लगीं तो चालक ने ऑटो आगे बढ़ा दिया। डेक की आवाज तेज कर देता है। इसके बाद रुकता है, पांच और सवारी (कुल दस) भरकर चल देता है। छात्राओं की शिकायत डेक की आवाज में दब जाती है।
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क्षमता से अधिक सवारियां
- फोटो : अमर उजाला
बोदला चौराहा: दोपहर 2.00 बजे
सड़क किनारे 35 आटोरिक्शा खड़े हैं। एक ऑटो में पांच सवारी पहले से हैं। चालक दो महिलाओं को बैठने के लिए कहता है, वे मना कर देती हैं तो भद्दे कमेंट करता है और आगे बढ़ जाता है। डेक की आवाज तेज कर देता है। बोदला चौराहे से शाहगंज, अलबतिया, सिकंदरा के लिए ऑटो चलते हैं। इस रूट पर 200 से अधिक ऑटो चलते हैं।
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एसएसपी बबलू कुमार
- फोटो : अमर उजाला
बिजलीघर चौराहे पर फिर से ऑटोराज
डेढ़ साल पहले तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने खुद खड़े होकर बिजलीघर चौराहे को बेतरतीब खड़े हो रहे ऑटो से मुक्त कराया था। इसके बाद आए एसएसपी जोगेंद्र सिंह ने अभियान चलाया। बबलू कुमार ने भी कार्रवाई कराई लेकिन पिछले दो महीने में यहां फिर से ऑटोवालों का कब्जा हो गया है। 500 से ज्यादा ऑटो चल रहे हैं यहां से।
नियम-कायदे तार तार
1. आटो चालकों के लिए खाकी ड्रेस अनिवार्य है। वे नहीं पहन रहे, 2. नेमप्लेट लगाना भी जरूरी है, इसका पालन नहीं हो रहा, 3. आटो में डेक लगाने की इजाजत नहीं है, यहां तो तेज आवाज में चला रहे हैं। आटो बिजलीघर से शहीद नगर, राजा मंडी, शहीद नगर, राजपुर चुंगी, पुरानी मंडी, छीपीटोला, आगरा कैंट। भगवान टॉकीज से रामबाग, टेढ़ी बगिया, दयालबाग, आईएसबीटी, सिकंदरा। बोदला चौराहे से शाहगंज, अलबतिया, विनय नगर, सिकंदरा आदि रूटों पर संचालित हैं। ऑटो की चेकिंग में फोकस इसी पर रहता है कि शहर में देहात रूट के ऑटो न चल रहे हों। तीन से ज्यादा सवारियां, डेक चलाने के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। -अनिल कुमार, आरटीओ (प्रवर्तन)