आगरा में नौ शक्तियां महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं। उनको आत्मनिर्भर और आत्मरक्षा में निपुण बना रही हैं। बच्चियों को शिक्षित करने, उन्हें बीमारियों से बचाने की मुहिम चला रही हैं। अमर उजाला शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्र के पहले दिन इन नौ शक्तियों और उनकी मुहिम से आपको रूबरू करा रहा है।
एक लाख से अधिक युवतियों को दिया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
एक लाख से अधिक युवतियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने वालीं अपर्णा राजावत का लक्ष्य हर युवती को अपराजिता बनाना है। राजावत ने पिंक बेल्ट मिशन शुरू कर इसका बीड़ा उठाया है। 28 फरवरी, 2018 को पिंक बेल्ट मिशन की स्थापना की गई और अब यह सात राज्यों में काम कर रहा है। 19 फरवरी 2020 को राजावत ने एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में 7401 युवतियों को एकसाथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। हॉलीवुड के फिल्म डायरेक्टर जान मैकलीट ने भी अपर्णा के पिंक बेल्ट मिशन और भारतीय महिलाओं की स्थिति को आगरा में शूट किया।
19 बालिकाओं को वधू बनने से बचाया, मुहिम जारी
चाइल्ड लाइन में आठ साल से कोआर्डिनेटर ऋतु वर्मा अब तक 19 बालिकाओं को वधू बनने से बचा चुकी हैं। इस दौरान उन्हें लोगों के उग्र विरोध का सामना भी करना पड़ा। वह बताती हैं कि आज भी देहात क्षेत्र में बाल विवाह हो रहे हैं। हमारे पास सूचना आती है तो हम बाल विवाह को रुकवाने के लिए पहुंचते हैं। वहां लोग विरोध करते हैं। हमने ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज कराए हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए भी मुहिम चला रहे हैं ताकि वे बच्चों का विवाह न कराएं। इससे बच्चों को मानसिक पीड़ा तो होती ही है, उनका विकास भी रुक जाता है।
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समाजसेवी शीतल अग्रवाल
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अच्छे स्वास्थ्य के बारे में महिलाओं को जागरूक कर रहीं
समाजसेवी शीतल अग्रवाल ने वर्ष 2013 में महिलाओं को अच्छे स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की मुहिम शुरू की। मासिक धर्म के बारे में जानकारी देकर साफ-सफाई के लिए जागरूक किया। करियर के शुरुआती दौर में शीतल एक विद्यालय में प्रधानाचार्या बनीं और उन्हें पता चला कि इस बारे में जानकारी का अभाव है। पहली बार तीन महिलाओं को जागरूक किया। पैड का वितरण शुरू किया। अभियान जारी है। शीतल को विश्व हिंदू महासंघ ने मातृ शक्ति सम्मान, मेयर नवीन जैन ने महिला सशक्तिकरण और ‘अमर उजाला’ ने नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा है।
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समाजसेवी डॉ. हृदेश चौधरी
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300 से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहीं
समाजसेवी डॉ. हृदेश चौधरी ने समाज के उस वर्ग को शिक्षित करने का संकल्प लिया, जो जन सुविधाओं से पूरी तरह से वंचित हैं। वह पिछले सात सालों से आराधना संस्था के माध्यम से गाड़िया लुहार जाति (घुमंतु समाज) के तीन सौ से अधिक बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान कर सुनहरा भविष्य दे रही हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चियों की है। ताजनगरी में सड़कों के किनारे करीब 500 गाड़िया लुहार जाति के परिवार रहते हैं। संस्था ने कई परिवारों के आधार और वोटर कार्ड बनवाने में मदद की। हृदेश चौधरी को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है।
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आगरा की पहली महिला क्रिकेटर आलराउंडर हेमलता काला
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रूढ़िवादी सोच को दरकिनार कर मैदान में दिखाया दम
आगरा की पहली महिला क्रिकेटर आलराउंडर हेमलता काला शहर के लिए महिला क्रिकेट का पर्याय हैं। उन्होंने कोच के रूप में यूपी महिला क्रिकेट टीम और रेलवे की महिला क्रिकेट टीम को प्रशिक्षण दिया। वह युवतियों को खेलने के लिए प्रेरित करती हैं। 15 जुलाई, 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओर से पदार्पण किया। यह वह समय था जब महिलाओं का खेल के मैदान में जाना लोगों को रास नहीं आता था। रूढ़िवादी सोच से लड़कर वह खेलीं और सात टेस्ट मैचों की दस पारियों में 503 रन बनाए। उनके नाम टेस्ट मैचों में पांच विकेट भी हैं। वह बीसीसीआई की महिला चयन समिति की मुख्य चयनकर्ता रही हैं।
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स्मृति चाहर
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रेत पर क ख ग लिखता देख बनाया सुदर्शन विद्यालय
स्मृति चाहर जरूरतमंद बच्चों के लिए स्कूल चला रही हैं। शुरुआत की कहानी रोचक है, आवास विकास कॉलोनी में मजदूरी कर रहे दो बच्चों को रेत पर क ख ग लिखते देखकर उनके लिए निशुल्क स्कूल का विचार आया। वर्ष 2017 में सुदर्शन विद्यालय खोला और मुहिम शुरू हो गई। तीन साल में 200 से अधिक बच्चे सुदर्शन विद्यालय में शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। इनमें अधिकांश वो बच्चे हैं जिनके पिता इस दुनिया में नहीं रहे। इसलिए बच्चे दिन में काम पर जाते हैं। दोपहर में शिक्षा लेते हैं। इस समय विद्यालय से 42 बच्चे जुड़े हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या बच्चियों की है।
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डॉक्टर नीतू चौहान
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रक्त-प्लाज्मा का समझाया महत्व
कोरोना वायरस की महामारी में रक्तदान कम हुआ, इससे मरीजों के इलाज में दिक्कत होने लगी। कोरोना के संक्रमित मरीजों के लिए प्लाज्मा जुटाने की जिम्मेदारी और बढ़ गई। ऐसे में एसएन मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने अपनी टीम के साथ लोगों की काउंसिलिंग कर रक्तदान और प्लाज्मा के लिए जागरूक किया। उनकी मेहनत का नतीजा रहा कि अब तक एसएन में 79 लोग प्लाज्मा दान कर चुके हैं और रक्त की पहले जैसी किल्लत नहीं हैं।
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रक्तदाता देवांशी
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सेवा का ऐसा जुनून 12 बार किया रक्तदान
जीवनीमंडी की देवांशी बंसल को मरीज सेवा का ऐसा जुनून है कि 26 साल की उम्र में उन्होंने 12 बार रक्तदान किया है। यहां तक कि कोरोना वायरस के दौर में भी सितंबर को जन्मदिन पर रक्तदान करने पहुंची। उन्होंने बताया कि 2016 में पहली बार रक्तदान करने जा रही थी तो पिताजी चिंतित थे, कहीं कोई दिक्कत न हो, लेकिन उन्हें रक्तदान का महत्व बताया। फिर क्या वह साल में दो बार रक्तदान जरूर करती हैं। बोली, उनके रक्त से किसी की जान बचे, इससे बड़ी मानव सेवा और क्या हो सकती है।
मरीज की जान बचाने के लिए मथुरा से प्लाज्मा दान करने आईं
मथुरा रहने वाली पलक अग्रवाल जून में कोरोना वायरस से संक्रमित हो गईं। ठीक होकर घर पर क्वारंटीन में रहीं। चिकित्सक प्लाज्मा दान करने के लिए अपील भी कर रहे थे। इसी बीच परिचित संक्रमित मरीज को प्लाज्मा की जरूरत पड़ी। संक्रमित मरीज उनके ब्लड ग्रुप का ही था, कहीं व्यवस्था न होने पर उन्होंने ही प्लाज्मा दान करने का निर्णय लिया। उन्होंने एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में प्लाज्मा दान किया। पलक ने बताया कि कोरोना के दौर में संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वह प्लाज्मा दान कर चिकित्सकों की इलाज में मदद करें।