विश्व पर्यावरण दिवस पर लोगों ने प्रकृति को सहेजने के लिए भले ही एक पौधा न रोपा हो, लेकिन प्रकृति ने इस दिन शुद्ध हवा का शानदार तोहफा दिया है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) की शुरुआत के पांच वर्षों में पर्यावरण दिवस पर ताजनगरी में सबसे स्वच्छ हवा इस वर्ष ही मिली।
विज्ञापन
2 of 5
ताजमहल में पसरा सन्नाटा
- फोटो : Amar Ujala
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स में शुक्रवार को आगरा का एक्यूआई महज 47 रहा, जो सबसे अच्छी श्रेणी में आता है। शुक्रवार शाम को यह आंकड़े जारी किए गए। इस वर्ष 47 एक्यूआई पिछले वर्ष के 152 के मुकाबले महज एक तिहाई से भी कम है।
विज्ञापन
3 of 5
चंबल नदी
- फोटो : अमर उजाला
2016 में एयर क्वालिटी इंडेक्स में पार्टिकुलेट मैटर 2.5 माइक्रोग्राम की शुरुआत हुई थी। तब 220 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पर धूल कण आगरा की हवा में मौजूद थे, लेकिन 5 वर्षों में इस वर्ष यह पहला मौका था जब पर्यावरण दिवस पर प्रदूषण का स्तर महज 45 पर रहा। इसे काफी अच्छा माना जाता है। बीते वर्षों में मानसून को छोड़कर इस तरह की एयर क्वालिटी पूरे साल नजर नहीं आती।
4 of 5
आगरा लॉकडाउन
- फोटो : अमर उजाला
मोनोक्साइड की मात्रा बढ़ना नुकसानदेह
लॉकडाउन के बाद से ही शहर की आबोहवा में सुधार आया है लेकिन लॉकडाउन खत्म होने के बाद कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यह पर्यावरण प्रेमियों के लिए चिंता का सबब भी है। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर रंजीत कुमार का कहना है कि मोनोऑक्साइड की मात्रा को नियंत्रण में करने के लिए ट्रैफिक पर ध्यान दिया जाना चाहिए। मोनोऑक्साइड लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इस समय पर्यावरण बेहतर है और इसे इसी स्थिति में बरकरार रखने की जरूरत है।