गेंदा की फसल देखते किसान रवि पाल
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वैज्ञानिकों की सलाह पर रवि ने छिवकरिया गांव में फूलों की खेती करने का फैसला लिया। दिसंबर 2014 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और गांव लौट आए। परिवार की 20 बीघा जमीन में से पहली बार में उन्होंने दो बीघा में गेंदे के फूल की खेती की। पांच माह में 75 हजार रुपये की आमदनी हुई, तो हौसला बढ़ा। आज वह दो हेक्टेयर में गेंदा की खेती कर रहे हैं। वर्तमान में मैनपुरी, इटावा, फिरोजाबाद, एटा, ओरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज आदि जिलों के दो सौ से अधिक किसान परिवार उनसे जुड़े हैं।