अखाड़े में बड़े-बड़े पहलवानों को चित करने वाली राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता आगरा की नीलम सोलंकी साप्ताहिक हाट में श्रृंगार का सामान बेचने के लिए मजबूर हैं। पिता छोटे किसान हैं, खेती से इतना नहीं हो पाता कि परिवार का पालन हो सके। साप्ताहिक हाट से पहले एक-दो दिन नीलम और उनकी दो अन्य पहलवान बहनें सामान खरीदकर लाती हैं। हाट के दिन तड़के ही निकल जाती हैं। नीलम का कहना है कि वह सिर्फ खेल पर ध्यान देना चाहती है लेकिन हाट में जाना मजबूरी है।