फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जिंदगी के दंगल में गरीबी से लड़ रहीं राष्ट्रीय पदक विजेता पहलवान, श्रृंगार का सामान बेचने को मजबूर

Sat, 30 Jan 2021 12:11 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
राष्ट्रीय पदक विजेता नीलम और उनकी बहन पूनम - फोटो : अमर उजाला
अखाड़े में बड़े-बड़े पहलवानों को चित करने वाली राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप की कांस्य पदक विजेता आगरा की नीलम सोलंकी साप्ताहिक हाट में श्रृंगार का सामान बेचने के लिए मजबूर हैं। पिता छोटे किसान हैं, खेती से इतना नहीं हो पाता कि परिवार का पालन हो सके। साप्ताहिक हाट से पहले एक-दो दिन नीलम और उनकी दो अन्य पहलवान बहनें सामान खरीदकर लाती हैं। हाट के दिन तड़के ही निकल जाती हैं। नीलम का कहना है कि वह सिर्फ खेल पर ध्यान देना चाहती है लेकिन हाट में जाना मजबूरी है। 
विज्ञापन

2 of 5
राष्ट्रीय पदक विजेता नीलम - फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2015 में कर्नाटक में हुई राष्ट्रीय कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य जीतने के बाद सहारा गांव की रहने वाली नीलम सुर्खियों में आई थीं। सात पहलवान बहनों की कहानी सभी की जुबान पर थी। शहर की तमाम संस्थाओं ने उनकी आर्थिक मदद करने की घोषणा की लेकिन किया कुछ नहीं। मां विद्या देवी ने बताया कि सातों बहनें सीमा, रेखा, पूनम, प्रीति, रीना, गीता और नीलम के लिए कुश्ती सबसे पहले है। बाकी बेटियों की शादी हो गई है। नीलम और पूनम पिता को परिवार का खर्चा चलाने में मदद करती हैं। 
विज्ञापन

3 of 5
आगरा: नीलम की बहन पूनम - फोटो : अमर उजाला
नीलम और पूनम को हाट और उसके एक दिन पहले उनको कुश्ती के बारे में सोचने तक का समय नहीं मिलता। सप्ताह में दो-तीन दिन अभ्यास नहीं कर पाना उनको सबसे अधिक अखरता है। पिता विशंभर सिंह सोलंकी ने बताया कि नीलम में कुश्ती को लेकर इस कदर जुनून है कि इस बार दो दिन तक चलने वाली चैंपियनशिप के दौरान उसने हाट में जाकर सामान बेचने से मना कर दिया है। नीलम का कहना है कि कुश्ती मेरा पहला जुनून है। यह अलग बात है कि किसी को मेरी तकलीफ कभी दिखाई नहीं दी। 

4 of 5
राष्ट्रीय पदक विजेता नीलम - फोटो : अमर उजाला
सात पहलवान बेटियों के सपने को साकार करने के लिए नीलम सोलंकी के पिता विशंभर सिंह सोलंकी ने अपना खेत तक बेच दिया। बोले कि बेटियों के जुनून ने कई बार उन्हें पसोपेश में डाला। लोगों ने कहा कि बेटियों का घर बसाने पर ध्यान दो। लेकिन एक दिन नीलम ने आंखों में आंसू लिए कहा, पापा मैं पहलवान बनना चाहती हूं। बस निर्णय लिया और बेटियों को पहलवान बनाने के लिए जो हो सकता है वह किया। खेत तक बेच दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पूनम सोलंकी - फोटो : अमर उजाला
जिला कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजकुमार चाहर ने बताया कि भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह ने राष्ट्रीय स्तर की महिला पहलवान के परिवार को सहायता राशि देने की बात कही है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें