फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नंदगांव में आज भी द्वापर की तरह मनाया जाता है नंदोत्सव, यह नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा

Tue, 20 Aug 2019 12:59 PM IST
मुकेश कुमार यतेंद्र तिवारी, अमर उजाला, नंदगांव (मथुरा)
विज्ञापन
1 of 6
भव्य रूप से सजाया गया नंदभवन - फोटो : अमर उजाला
नंद बाबा के गांव नंदगांव का नंदोत्सव यदि आपने नहीं देखा तो समझो कुछ नहीं देखा। इस गांव में आज भी द्वापर की भांति नंदोत्सव मनाया जाता है। जन्माष्टमी से कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाता है। तमाम देवी-देवताओं के द्वापर में नंदगांव आने की लीलाओं का मंचन किया जाता है। मान्यता रही है कि कंस के भय के कारण नंद बाबा गोकुल में कन्हैया का जन्मोत्सव नहीं मना सके। इसीलिए नंदगांव वास के दौरान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया था। 
विज्ञापन

2 of 6
नंद भवन में जन्मोत्सव से पहले का माहौल (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
नंदगांव-बरसाना की विशेष परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद यहां श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है। इसी कारण नंदगांव में 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। 24 अगस्त को मनाया जाएगा ब्रजवासियों का प्रिय नंदोत्सव। अष्टमी की संध्या से ही बरसाना के गोस्वामी समाज के लोग नंद भवन पहुंचते हैं। 
विज्ञापन

3 of 6
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
दोनों गांवों के गोस्वामी समाज के मध्य समाज गायन होता है। संयुक्त समाज गायन के दौरान लाला के जन्म की बधाई गाई जाती है। बरसाना गोस्वामी समाज को बधाई के उपहार स्वरूप लड्डू भेंट किया जाता है। रात 10 बजे मंदिर में ढांड़ पुरोहित द्वारा नंदबाबा की वंशावली का बखान किया जाता है।

4 of 6
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मध्य रात को मंदिर में पंचामृत से लाला के श्रीविग्रह का गुप्त अभिषेक होता है। ठीक 12 बजे मंदिर के पट खुलते ही सारा प्रांगण नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंज उठता है। नवमी को दधिकांधो, मल्ल युद्ध, बांस बधायी, भांड़ लीला, शंकर लीला आदि का मंचन होता है। नंद महोत्सव के दौरान श्रीकृष्ण बलराम को रजत हिंडोले में बाहर जगमोहन में विराजमान किया जाता है।
विज्ञापन

5 of 6
नंदगांव स्थित नंदभवन - फोटो : अमर उजाला
कंस के कारागार में अवतरण के बाद श्री कृष्ण को वासुदेव द्वारा नंद के घर गोकुल ले जाया गया। गोकुल में कंस के राक्षसों से असुरक्षित जान नंद बाबा ने शांडिल्य ऋषि से परामर्श किया। शांडिल्य ऋषि ने नंदबाबा को श्री कृष्ण के लिए नंदीश्वर पर्वत को सुरक्षित स्थान बताया। ऋषि ने बताया कि नंदीश्वर पर्वत की परछाईं जितनी परिधि में जाएगी उतना स्थान श्रीकृष्ण के लिए सुरक्षित है। ऋषि के परामर्श के अनुसार नंदबाबा ने सपरिवार नंदीश्वर पर्वत के समीप आकर नंदगांव बसाया। सेवायत दीपक गोस्वामी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण यहां 11 वर्ष 52 दिन तक रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
भगवान श्रीकृष्ण के लिए बहनों ने भेजी राखियां - फोटो : अमर उजाला
जन्माष्टमी के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। यह समूचे भारत में एक अनूठी परंपरा है। मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन ही वृद्धावस्था में नंद के घर कन्हैया का जन्म हुआ। उस समय बहनों ने लाला के जन्म की प्रतीक्षा कर जन्म के दिन राखी बांधने का प्रण लिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें