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मां-बच्चों की हत्या का खुलासा: कर्ज की रकम का तगादा करने से नाखुश था संतोष, ऐसे दिया सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम

Wed, 28 Jul 2021 10:30 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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मृतका रेखा और उसके बच्चों के फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
आगरा के कूंचा साधूराम में चार लोगों की हत्या का आरोपी संतोष राठौर रेखा का रिश्ते का भाई है। रेखा के पिता विनोद राठौर की बुआ रतनदेवी सीता नगर में रहती हैं। संतोष रतन देवी के बेटे बादाम सिंह का बेटा है। उसकी परचून की दुकान है। पुलिस के अनुसार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि संतोष ने रेखा से दो लाख रुपये का कर्ज लिया था। इसके अलावा भी कभी दस हजार तो कभी पांच हजार लेकर जाता रहा। इसके बाद रेखा ने उसे अपना स्कूटर भी बेच दिया था। संतोष ना तो कर्ज में लिए रुपये लौटा रहा था और न ही स्कूटर की पूरी रकम अदा कर रहा था। इसी को लेकर रेखा से उसकी अनबन हो गई थी। रेखा उसे फोन करके तगादा कर रही थी। उससे कहा था कि वह मकान बेचकर दिल्ली जाना चाहती है। इसलिए रुपयों की जरूरत है। संतोष के पास कर्ज चुकाने के लिए रुपये नहीं थे। उसने रेखा की हत्या की साजिश रची। बता दें कि बुधवार-गुरुवार को कूंचा साधूराम के एक घर में चार शव मिले थे, जिसके बाद पुलिस परिचित पर हत्या करने का शंक जता रही थी।
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रेखा और उसके तीन बच्चों के हत्यारोपी संतोष व वीरू - फोटो : अमर उजाला
अंशुल और वीरू को दिया था लूट में हिस्से का लालच
संतोष को उम्मीद थी कि रेखा के घर में पांच से छह लाख रुपये और पति के चांदी के जेवरात मिल जाएंगे। उसने अपने दोस्तों अंशुल और वीरू से बात की। उन्हें बराबर का हिस्सा देने का वादा किया। संतोष ने अपने दोस्तों को मकान दिलाने का झांसा देकर रेखा से घर का गेट खुलवाया। मौका पाकर रेखा, वंश, पारस और माही की कैंची और चाकू से गला रेतकर हत्या कर दी। इसके बाद घर में लूटपाट की। वारदात के अगले दिन वह बस से चित्रकूट भाग गए। अंशुल और वीरू कबाड़े का काम करते हैं। 
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मृतका रेखा का फाइल फोटो, हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला
दूध में दीं नींद की गोलियां, हत्या के बाद तीन घंटे खंगाला घर
आईजी रेंज नवीन अरोरा ने बताया कि रेखा से संतोष ने दो लाख रुपये उधार लिए थे। वादा किया था कि वह ब्याज सहित लौटा देगा। मगर, ऐसा नहीं किया। इसके बाद रेखा से छह महीने पुराना स्कूटर भी ले लिया था। पूरी रकम नहीं दी। दो लाख रुपये और स्कूटर की रकम के लिए रेखा तगादा कर रही थी। संतोष ने अपनी दुकान के लिए पहले से कर्ज ले रखा था। इस कारण वो रेखा को रकम नहीं लौटा पा रहा था। रेखा के तगादे से बचने और अपना कर्ज चुकाने के लिए रेखा और उसके बच्चों की हत्या की साजिश रची, जिससे घर में आसानी से लूट कर सके। उसने अपने पड़ोसी अंशुल को शामिल किया, कहा कि जो पैसे और जेवरात मिलेंगे, उसे बांट लेगा। इसके बाद वीरू को भी अपने साथ कर लिया।

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रेखा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रेखा के स्कूटर से आए थे तीनों 
योजना के तहत तीनों रेखा की एक्टिवा पर धूलिया गंज तक आए। धूलिया गंज पर स्कूटर खड़ा करके तीनों पैदल रेखा के घर पहुंचे। संतोष ने दरवाजा खटखटाया। रेखा के बेटे वंश उर्फ टुकटुक ने दरवाजा खोला। संतोष ने कहा कि यह मकान देखने आए हैं। टुकटुक ने मां से पूछा। रेखा ने तीनों को नीचे ही कमरे में बैठाने के लिए बोल दिया। वह पूजा कर रही थी। टुकटुक बाजार से कपूर, फूल, कलावा, समोसे लेकर आया। वहीं दूसरी तरफ रेखा ने तीनों को ऊपर बुला लिया। संतोष नींद की गोलियां लेकर गया था। संतोष ने रेखा से कहा कि वह दवाई लाया है। यह डॉक्टर ने दी हैं, इससे शरीर का दर्द कम हो जाएगा। उसने रेखा को दूध में गोलियां दे दीं। बातचीत के दौरान बच्चों को भी दूध में नींद की गोलियां मिलाकर दे दीं। मगर, सभी को गोलियों का असर कम हुआ। वह बेहोश नहीं हुए। 
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रेखा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले रेखा को मारा, बाद में टुकटुक को
रेखा ने पारस और माही को नीचे खेलने के लिए भेज दिया। रेखा चाय बनाने लगी। आरोपियों को डर था कि चाय पीने से कप पर कहीं फिंगर प्रिंट नहीं आ जाएं। इसलिए उन्होंने बहाना बनाकर चाय के लिए मना कर दिया, तब तक रेखा चाय बनाने के लिए रख चुकी थी। वीरू और अंशुल सोफे पर बैठे थे। रेखा किसी काम से अपने कमरे में गई। पीछे से संतोष भी कमरे तक पहुंच गया। उसने रेखा को पकड़ लिया। उससे पूछा कि माल कहां है। रेखा डर गई, उसने शोर मचाने का प्रयास किया। संतोष ने उसका मुंह दबाया और गर्दन में कैंची घुसेड़ दी। रेखा छटपटाने लगी। पलंग से नीचे गिर पड़ी। इसी बीच टुकटुक बाजार से लौटा। उसे मां की आवाज सुनाई पड़ी। वह ऊपर आया। संतोष के साथियों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। वह नीचे भागा, उसका चश्मा गिर पड़ा। अंशुल और वीरू उसे पकड़ कर स्टोर रूम में ले गए। वहां चाकू से टुकटुक का गला रेत दिया। पारस और माही नीचे थे। संतोष को लगा कि इन दोनों को जिंदा छोड़ा तो ये पुलिस को बता देंगे। संतोष के कहने पर अंशुल और वीरू दोनों बच्चों को ऊपर ले आए। हत्यारोपियों ने उन्हें बेड पर पर मार डाला।
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रेखा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
पुलिस से बचने के लिए कर रखी थी पूरी तैयारी 
संतोष ने हत्याकांड के बाद पुलिस से बचने की भी पूरी तैयारी कर रखी थी। वह अपने साथ हैंड ग्लव्स लेकर आया था, जिससे उनके फिंगर प्रिंट नहीं आएं। वहीं घर पर रेखा के चाय बनाने पर डर था कि कप पर उनके फिंगर प्रिंट आ जाएंगे। इसलिए चाय पीने से मना कर दिया। पुलिस को आशंका है कि वह कैंची और चाकू भी अपने साथ लेकर आए थे। हत्या के अगले दिन बस से संतोष और अंशुल सोरों, कासगंज, कन्नौज, कानपुर होते हुए चित्रकूट पहुंचे। वीरू भी उनके पीछे-पीछे गया था।  
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मृतका रेखा का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कुत्ता बोलने पर खुन्नस मान गया था संतोष 
संतोष ने पुलिस को बताया कि रेखा जब भी उसको फोन करती थी, रुपयों के लिए बुरा-भला कहती थी। यहां तक कि उसे कुत्ता बोलती थी। यह बात उसको बुरी लगती थी। रेखा के बार-बार तगादा करने की वजह से वो उससे नाराज था। उसे हत्या के बाद किसी तरह का अफसोस भी नहीं था। 

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आगरा में सामूहिक हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
लैपटॉप और मोबाइल में थे राज, इसलिए ले गए
पुलिस ने बताया कि पति सुनील से तलाक के बाद रेखा बच्चों के साथ रहती थी। घर चलाने वाला कोई नहीं था। इस कारण संतोष घर पर आता था। उस पर गलत नजर रखता था। उसे यह बात पसंद नहीं थी कि रेखा रामपुर निवासी जैनुद से बात करे। रेखा के पास रिश्तेदार भी नहीं आते थे। मगर, संतोष बार-बार घर आ रहा था। इस कारण ही रेखा उसकी मदद कर रही थी। वह उससे अपने परिवार के बारे में भी जानकारी लेती थी। पुलिस की पूछताछ में संतोष ने बताया कि हत्या के बाद मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट लूटने का एक ही मकसद था कि उनके बारे में जो कुछ उनमें होगा, वो पता नहीं चलेगा। पुलिस को आशंका है कि यह वीडियो और ऑडियो हो सकते हैं। इसलिए तीनों को संतोष ने छिपा दिया है। उसे भी पता था कि पुलिस सर्विलांस की मदद से उसे पकड़ लेगी। उसने लैपटॉप, मोबाइल और टैब को झाड़ियों में फेंकने की बात बताई है। अब पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

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इसी स्कूटर से आए थे आरोपी - फोटो : अमर उजाला
हत्या के बाद घर में मिले पांच जोड़ी पायल और 2700 रुपये 
आगरा पुलिस का कहना है कि संतोष को उम्मीद थी कि रेखा के पास तलाक में मिले पांच से छह लाख रुपये रखे हुए हैं। इसके अलावा चांदी के जेवरात भी होंगे। क्योंकि पति सुनील चांदी का काम करता था। इसी के चलते उसने हत्या की योजना बनाई। संतोष, अंशुल और वीरू दोपहर 12:30 बजे रेखा के घर पहुंच गए थे। एक घंटे तक बच्चों के साथ बातचीत करते रहे। इसके बाद रेखा ने उन्हें प्रथम तल पर बुला लिया। वह मकान के संबंध में बात करते रहे। चारों की हत्या करने के बाद तीन घंटे तक घर को खंगाला था। उन्हें तलाशी में सिर्फ 2700 रुपये, पांच चांदी की पायल ही मिली थीं। हालांकि वो लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल भी उठा ले गए थे। 

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हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी कैमरे से मिला पुलिस को सुराग 
संतोष के बारे में पुलिस को सुराग सीसीटीवी कैमरे से मिला था। हत्याकांड के खुलासे के लिए कोतवाली थाना के प्रभारी निरीक्षक सुभाष चंद्र पांडेय सहित उनके थाने के कई एसआई और सिपाही लगे हुए थे। रेखा के घर आने के दो रास्ते हैं। इनमें से एक पाय चौकी से आने का है। दूसरा बेगम ड्योढ़ी से आने का है। आरोपी हत्या करने के बाद बेगम ड्योढ़ी के रास्ते से निकले थे। यहां पर एक जूता फैक्टरी पर सीसीटीवी कैमरा लगा है। इसके फुटेज चेक करने पर पता चला कि संतोष लैपटॉप का बैग लेकर जा रहा है। उसे रिश्तेदार ने पहचान लिया। इसके बाद उसके साथी तीन से चार मीटर की दूरी पर पैदल निकले थे। पुलिस ने संतोष की तलाश की। मगर, वह घर पर नहीं मिला। घरवालों ने बताया कि वह नोएडा गया हुआ है। इससे पुलिस का शक बढ़ गया। उसके घर पर एक एक्टिवा भी खड़ी थी। उस पर नंबर नहीं था। पुलिस ने उसके बारे में पता किया तो वह रेखा की निकली। इससे पुलिस का शक पुख्ता हो गया। इस पर पुलिस उसकी तलाश करने लगी। उसे मंगलवार को पकड़ लिया, उसके साथ वीरू भी पकड़ा गया। अंशुल फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। 
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हत्यारोपी संतोष और वीरू - फोटो : अमर उजाला
संतोष नहीं उगल रहा था सच, दोस्त ने दी जानकारी 
पुलिस ने रविवार को ही संतोष को पकड़ लिया था। वह सच नहीं बोल  रहा था। उससे एक्टिवा के संबंध में पूछताछ हुई। उसने यही कहा कि रेखा ने बेचा था। वह काम से नोएडा गया था, जबकि वह नोएडा में नहीं था। घटना दोपहर में 12:30 से 4:30 बजे के बीच हुई थी। इस दौरान संतोष का मोबाइल स्विच ऑफ था। इससे पुलिस को पहले से ही उस पर शक था। मगर, उसने सच नहीं उगला। इस पर पुलिस ने उसके दोस्त वीरू से बात की। वीरू ने बताया कि किसी को मारने की बात नहीं हुई थी। मगर, संतोष ने रेखा को मार दिया। बचने के लिए बच्चों को मारना पड़ा। संतोष के हत्याकांड में पकड़े जाने के बाद पिता बादाम सिंह ने दूरी बना ली। उनका कहना था कि बेटे ने जो किया वह माफी के लायक नही है। उसे सजा मिलनी चाहिए।
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