समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव एक बार फिर उस संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां से जीतकर वो केंद्र की सत्ता में पहुंचे थे। या यूं कहिए उस चुनाव से मुलायम ने अपनी संसदीय राजनीति का धमाकेदार आगाज किया था।
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मुलायम सिंह यादव
बात 23 साल पुरानी है। वर्ष 1996 में मैनपुरी सीट से पहली बार मुलायम सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ा। यहां से जीत हासिल की। केंद्र की सत्ता में रक्षा मंत्री का ओहदा पाया। केंद्र में संयुक्त मोर्चे की सरकार थी। यह सरकार बहुत लंबे समय तक नहीं चली।
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लोकसभा में मुलायम सिंह यादव (फाइल)
- फोटो : Amar Ujala
उस वक्त मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने को लेकर बात उठी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वो सबसे आगे खड़े थे, लेकिन सहयोगियों ने ही उनका साथ नहीं दिया। लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया।
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समाजवादी रथ में मुलायम सिंह के साथ अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 1999 में फिर लोकसभा चुनाव हुए। इस बार मुलायम सिंह यादव संभल और कन्नौज सीट से चुनाव लड़े। दोनों जगह से जीत हासिल की। बाद में उन्होंने कन्नौज सीट अपने बेटे अखिलेश यादव के लिए छोड़ दी। यहां से अखिलेश पहली बार सांसद बने।
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मुलायम सिंह
मुलायम सिंह ने मैनपुरी सीट से चार बार लोकसभा का चुनाव जीता है। 2004, 2009 व 2014 में भी वो यहां सांसद चुने गए। 2014 में मुलायम ने आजमगढ़ से भी लोकसभा चुनाव जीता। इसलिए मैनपुरी सीट छोड़ दी। इसके बाद हुए उपचुनाव में मुलायम सिंह के पोते तेजप्रताप सिंह यादव ने जीत दर्ज की।
समाजवादी रथ में सवार मुलायम सिंह यादव
- फोटो : ANI
2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर मुलायम सिंह यादव मैनपुरी के मैदान में हैं। इस बार उनके सामने अभी तक किसी भी बड़ी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं उतारा है। कांग्रेस पहले ही मैनपुरी सीट से प्रत्याशी उतारने से इंकार कर चुकी है, वहीं भाजपा ने यहां से प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।