शहर में जगह-जगह मौत के गड्ढे खुले हुए है, अधिकारी इनको लेकर अंजान बने हुए हैं। अगर कोई शिकायत भी दर्ज कराता है तो कोई उसकी सुनने वाला नहीं है। आलम यह है कि शहर में सड़क किनारे बने मौत के गड्ढे बंद नहीं हो पा रहे हैं। शहर में जल निगम की ओर से सीवर लाइन तो डाल दी गई है, लेकिन उसका जलकल विभाग रखरखाब नहीं कर पा रहा है।
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शहर की प्रमुख सड़क पर खुला मेनहोल
- फोटो : अमर उजाला
आवास विकास कॉलोनी के वार्ड नंबर 75 की पार्षद सुषमा जैन का कहना है कि उन्होंने नगर निगम में जलकल बजट बैठक स्थगित होने के बाद जलकल महाप्रबंधक से जगह जगह खुले मेनहोल को ढकने की अपील की थी। इससे पहले भी कई बार शिकायत दर्ज कराई थी, जिससे कोई अप्रिय घटना न हो। तभी महाप्रबंधक जलकल ने कहा कि आवास विकास में कोई भी मेनहोल खुला नहीं है। सभी ढक दिए गए है। इस पर गुरुवार को मैंने फिर देखा तो मालूम चला आवास विकास सेक्टर चार, पांच और छह में जगह जगह मेनहोल खुले पड़े है।
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शहर की सड़क पर खुला मेनहोल
- फोटो : अमर उजाला
मेनहोल में गिरने की पूर्व में घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है। 26 मई को परिणय कुंज में सफाईकर्मी मैनहोल में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी उपचार के दौरान मौत हो गई थी। इसके पहले 21 अगस्त 2017 को भी सदर के उखर्रा रोड स्थित नगला टेकचन्द में मैनहोल में गिरकर युवक की मौत हो चुकी है। शायद जलकल अधिकारी शहर में भी किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं।
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आगरा के मेयर नवीन जैन
- फोटो : डेमो
महापौर नवीन जैन का कहना है कि जलकल विभाग की व्यवस्था बहुत बदहाल है, इसको लेकर 17 जून को नगर विकास मंत्री और नगर विकास सचिव से मिलने लखनऊ जा रहा हूं। दोनों से समय लिया है। अब जलकल में व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत है। इसके बाद ही कुछ हो सकता है।
आरएस यादव, महाप्रबंधक, जल संस्थान का कहना है कि जहां की भी शिकायत प्राप्त होती है, उसके बाद तत्काल मेनहोल बंद कराता हूं। अगर कोई खुला रह गया है या फिर ढक्कन टूटा हुआ है तो उसे भी बंद कराया जाएगा।