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मथुरा-वृंदावन में इस कदर है बंदरों का आतंक, हर वक्त खौफ के साये में रहते हैं लोग

Fri, 22 Nov 2019 12:27 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
मथुरा-वृंदावन में बंदरों के उत्पात से श्रद्घालुओं के साथ-साथ आम आदमी परेशान है। तीर्थनगरी के मंदिरों में दर्शन को आने वाले श्रद्घालुओं के चश्मे बंदरों के निशाने पर रहते हैं। यहां के बंदरों का 'उत्पात' अब संसद में गूंजा है। मथुरा की सांसद और बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री हेमामालिनी ने सरकार से मांग की है कि जनता को बंदरों की समस्या से मुक्ति दिलाई जाए। इससे यहां के लोगों में इस गंभीर समस्या से निजात मिलने की उम्मीद जगी है। 
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मुंह में मोबाइल दबाए बैठा बंदर - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में बंदरों की समस्या गंभीर है। इससे न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बंदरों के हमले में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में के आसपास राहगीरों का चश्मा, पर्स, प्रसाद, महंगे मोबाइल छीन रहे हैं। देशी-विदेशी भक्तों का सामान छीन ले जाने के साथ ही उन पर हमला भी कर रहे हैं। 
 
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बंदरों के आतंक के पीड़ित बालमुकुंद - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन निवासी बालमुकुंद ने बताया कि बंदरों ने मेरी मां को मार डाला। वो दर्द मुझे आज भी है। बंदरों पकड़ने की बातें पिछले कई वर्ष से हो रही हैं, लेकिन प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। चुनाव में जन प्रतिनिधि इस समस्या के से निजात दिलाने का वादा लंबे समय से कर रहे हैं, लेकिन निदान नहीं हो रहा है। 
 

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पीड़ित अशोक अरोड़ा - फोटो : अमर उजाला
अशोक अरोड़ा ने बताया कि बंदरों ने उन पर तीन माह पूर्व हमला किया था। जिसमें गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बंदरों के कारण बाजार में राहगीरों को सामान ले जाना भी मुश्किल हो रहा है। आशीष अग्रवाल ने कहा कि स्थानीय लोगों के साथ बंदरों से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है। वर्तमान में नगर की यह सबसे बड़ी समस्या है। सांसद ने इस मुद्दे को संसद में उठाया है, यह सराहनीय है।
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चश्मी छीन लेते हैं बंदर - फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के अस्पताल में बंदरों के काटने से घायल के उपचार के लिए पहुंचने वालों की संख्या करीब 50-55 तक पहुंच जाती है। इन्हें एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के स्वामी कृष्णा कालीनंद ने बताया कि प्रतिदिन पांच ऐसे लोग आते हैं, जिन्हें बंदरों ने घायल किया होता है। 
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल मथुरा-वृंदावन में 21 हजार बंदर हैं। इनमें से 2 हजार बंदरों को पकड़कर सुरक्षित बाह आगरा में सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की स्वीकृति नगर निगम को दी गई है। इसकी सहमति पिछले दिनों वेटरनेरी विवि में बंदरों पर आयोजित सेमिनार के दौरान वन विभाग द्वारा नगर निगम को दी गई है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वन विभाग के क्षेत्र अधिकारी एमके मीणा ने कहा कि आने वाले समय में बंदरों की समस्या से निजात दिलाने के मामले में मथुरा देश में मॉडल बनने जा रहा है। प्रास्तावित प्रोजेक्ट में बंदरों को मोहल्ला स्तर पर समूहों में पकड़कर उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। रेस्क्यू सेंटर में रखकर नसबंदी की जाएगी। इसके पश्चात प्राकृतिक सुरक्षित जगह पर उन्हें छोड़ा जाएगा। यह प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। 
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