यम फांस से मुक्ति के लिए बिन भाई मथुरा आई बहनों ने यमुना के घाट पर धर्म का नाता जोड़कर यमुना में डुबकी लगाई। किसी ने नाविक तो किसी ने गोताखोर से धर्म भाई का नाता जोड़ा।
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यमुना में लगाई डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा में यमुना किनारे चतुर्वेदी समाज के लोगों को धर्म का भाई बनाया। धर्म भाई संग यमुना स्नान किया और माथे पर तिलक लगाकर मिठाई खिलाई।
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शनिवार को यम द्वितीया के मौके पर मथुरा के विश्राम घाट पर यमुना स्नान करने मुंबई से आई पुष्पाबेन ने बताया कि उसके कोई भाई नहीं है। विश्राम घाट पर उसने चर्चा की तो चंद्रमोहन चतुर्वेदी नाम का युवक भाई बनने को तैयार हो गया। दोनों ने यमुना में डुबकी लगाई, तो पुष्पाबेन ने चंद्रमोहन के माथे पर तिलक किया और आरती उतारी और उपहार दिए। गुजरात के अहमदाबाद से आई हिजल के भी कोई भाई नहीं है।
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यमुना में लगाई डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने भी गणेश चतुर्वेदी को धर्म का भाई बना लिया और गणेश के माथे पर तिलक किया। गुजरात से आई मेघा ने भी इसी तरह यमुना पर भाई के रूप में अजय चतुर्वेदी से धर्म का नाता जोड़ा।
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यमुना में लगाई डुबकी
- फोटो : अमर उजाला
गुजरात के द्वारिका से मथुरा में यमद्वितीया पर स्नान करने पहुंची किरन ने भाई की फोटो और भतीजे के साथ यमुना में डुबकी लगाई। दरअसल किरन के भाई बाबेश की चार साल पहले मौत हो चुकी है। ऐसे में स्वर्गवासी भाई की फोटो को ही लेकर मथुरा आई। फोटो को हाथ में लेकर यमुना में गोते लगाए। वह बाबेश के बेटे को भी साथ लाई।
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शनिवार को सुबह आठ बजे से 10:30 बजे तक दोनों विश्राम घाट पर धर्म का भाई बनाने को भटकते रहीं, लेकिन कोई भाई बनने को तैयार नहीं हुआ। इसी दौरान एक चतुर्वेदी ने भाई के रूप में गमछा (साफी) लपेट कर डुबकी लगाने की सलाह दी।
इस पर कोमल व रामवती ने दो गमछे खरीद लिए और गले में डालकर यमुना में डुबकी लगाई। कोमल व रामवती ने बताया कि वे गमछे को अपने साथ रांची ले कर जा रही हैं। अब प्रत्येक भाई दूज पर गमछे को तिलक करेंगी।