जम्मू-कश्मीर में सरहद पर आईईडी विस्फोट में शहीद हुए बाह के गांव पुरा भदौरिया निवासी हवलदार संतोष कुमार सिंह का परिवार देशभक्ति से सराबोर रहा है। उनके चाचा हवलदार जय सिंह भदौरिया ने 1971 की जंग लड़ी थी। उन्होंने कहा कि भतीजे को खोने का गम है, लेकिन उसकी कुर्बानी से घरवालों का सीना 56 इंच का हो गया है।
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शहीद संतोष कुमार सिंह के परिजन
- फोटो : अमर उजाला
1986 में रिटायर्ड हुए जय सिंह भदौरिया ने बताया कि संतोष कुमार सिंह के बलिदान ने परिवार और देश का गौरव बढ़ाया है। बताया कि सेना में मां भारती की रक्षा के संकल्प के साथ ही सैनिक भर्ती होता है। पाकिस्तान की कायराना हरकत पर उन्होंने सरकार से मुंह तोड़ जवाब देने की मांग की।
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संतोष कुमार सिंह की भतीजी
- फोटो : अमर उजाला
परिवार के ही पूर्व फौजी कलियान सिंह 1999 में कारगिल जंग लडे़ थे। उन्होंने कहा कि कई बार पिटने के बाद भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कहा कि भतीजे के बलिदान परिवार के लिए गम के साथ गौरव की बात भी है। 2004 में रिटायर्ड हुए कलियान सिंह ने कहा कि संतोष का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगा।
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शहीद के परिजन व ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
संतोष कुमार सिंह का परिवार ही नहीं 500 आबादी वाला उनका पूरा गांव देशभक्ति से सराबोर है। 60 परिवार वाले गांव के वर्तमान से 41 लोग सेना में है, जबकि 20 लोग सेना से रिटायर्ड हो चुके हैं। गांव के लोग बताते हैं कि अधिकांश जवान सीमा पर तैनात हैं। युवा पीढ़ी में भी देश भक्ति का लहू दौड़ रहा है।
गांव के नौजवान देश भक्ति का जुनून लिए सुबह शाम चंबल की पगडंडी पर दौड़ते हुए देखे जा सकते हैं। संतोष कुमार सिंह के बलिदान पर हर घर का एक ही जवाब है कि आने वाली पीढ़ियों को इससे प्रेरणा मिलेगी। देश की सीमाओं की हिफाजत के लिए अपने बेटों को सेना में भेजने का जोश और जज्बा बढे़गा।