ताजनगरी में पतंग के थोक बाजार माल का बाजार में इन दिनों मकर संक्रांति करीब होने के कारण रौनक छाई हुई है। यहां तकरीबन एक दर्जन पतंगों की दुकानें हैं, जहां पतंगों को बनाने से लेकर बाहर से मंगाकर बेचने का काम किया जाता है। इनमें कई दुकानें तो एक सौ साल से ज्यादा पुरानी हैं।
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पतंग बाजार
- फोटो : अमर उजाला
माल का बाजार में सेंट्रो पतंग सेंटर के नाम से दुकान चलाने वाले शराफत खां बताते हैं कि उनकी दो पीढ़ियां पतंग बेचने और बनाने में निकल गईं। उनके पिता हाजी छोटे खां ने पतंगों का काम शुरू किया था। अब पूरे साल पतंगें नहीं बिकती हैं। सर्दी में मकर संक्रांति और गर्मियों में दशहरा पर लोग पतंग उड़ाते हैं। अब दो दिन से पतंग बाजार में बिक्री बढ़ गई है।
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पतंग बाजार
माल के बाजार में दुकानदारों के पास बरेली के मांझे की डिमांड है। यह मांझा आज भी पसंद किया जाता है। बच्चों के डोरीमोन, छोटा भीम से कार्टून की पतंगों की भरमार है। पाकिस्तान में भी आगरा में बनाई जाने वाली जहाज पतंग की डिमांड है। यही कारण है कि यहां से जहाज पतंग पाकिस्तान भेजी जाती हैं।
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पतंग बाजार
पतंग विक्रेता मोहम्मद हनीफ बताते हैं कि पतंगों के लिए कागज और पन्नी बाहर से मंगाते हैं। घरों में महिलाएं पतंग तैयार करती हैं। इस हस्तकला को भी सरकार ने करमुक्त नहीं रखा है। पांच फीसदी जीएसटी लगता है। इसलिए मुनाफा भी कम हो गया है। पतंगबाजी अब सालभर नहीं होती है। यही कारण है कि पतंग का कारोबार सिमट गया है।
ताजनगरी में पतंगबाजी का शौक अब महज त्योहारों तक सिमटकर रह गया है। लोगों का कहना है कि न अब पुराने जमाने के पतंगबाजी मुकाबले देखने को मिलते हैं और न ही आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों के बीच पेंच लड़ाते लड़ाकों की फौज ही दिखती है। मकर संक्रांति पर लोग अपनी छतों पर पतंग उड़ाकर रिवाज या परंपरा की रस्म अदायगी करेंगे।