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तस्वीरें: शारदीय नवरात्र में सजे मां के दरबार, इन मंदिरों में विशेष पूजा

Tue, 09 Oct 2018 11:17 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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पूजा कलश। - फोटो : अमर उजाला
शारदीय नवरात्र का महापर्व बुधवार से प्रारंभ हो रहा है। घरों में मां दुर्गा की चौकी सजाई जाएगी तो वहीं शहर भर में दुर्गा पंडालों में नौ दिन तक माता रानी की आराधना होगी। मंगलवार को श्रद्धालु तैयारियों में जुटे रहे तो मंदिरों में भी नवरात्र को लेकर विशेष तैयारियां चलती रहीं। 

मंदिरों में सजावट की गई तो वहीं राजा की मंडी स्टेशन स्थित मां चामुंडा मंदिर में भव्य आयोजन की रूपरेखा तय की गई। इस मंदिर में नौ दिन तक माता वैष्णो रानी का दरबार सजेगा। कृत्रिम गुफा का निर्माण किया गया है जहां माता वैष्णो देवी मंदिर कटरा जम्मू का एहसास भक्तों को होगा। 

दैनिक यात्री संघ के सदस्यों ने पत्रकार वार्ता के दौरान बताया कि यहां करीब 70 फुट लंबी गुफा का निर्माण किया गया है। गर्भजून गुफा और अमरनाथ की झांकी भी सजाई जाएगी। इस अवसर पर पोला भाई, सुभाष गुप्ता, आशू जैन, प्रदीप शर्मा, अरविंद उपाध्याय, जितेंद्र परिहार, निक्कू पंडित, राजा शर्मा आदि मौजूद रहे। 

घट स्थापना का शुभ मुहूर्त

आचार्य हरिकृष्ण पाराशर ने बताया कि निर्णय सागर पंचांग के अनुसार माता की चौकी और घट स्थापना का शुभ मुहूर्त लाभ बेला में सुबह 6 बजे से 7.30 बजे तक और अमृत बेला का समय सुबह 7.30 से 9 बजे तक और उसके बाद 10.30 बजे से दोपहर 12 बजे तक शुभ मुहूर्त है। 

ऐसे करें घट स्थापना
 
घट स्थापना से पहले जिस स्थान पर कलश और माता रानी की चौकी स्थापित की जा रही है। उस स्थान को गंगाजल से पवित्र कर लें। उसके बाद माता की
चौकी बिछाएं और उस पर लाल कपड़ा बिछाएं। माता की प्रतिमा स्थापित करें। एक कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, एक रुपया, बताशा डालें और ऊपर से ढक्कन लगा दें। कलश पर स्वास्तिक बनाएं। लाल कपड़े से लपेटकर उस पर नारियल रखें।

माता का आह्वान करें और विधि विधान से पूजन करें। धूप, दीप, पुष्प अर्पित कर माता को भोग लगाएं। दुर्गा सप्तसती या दुर्गा चालीसा का पाट करें। नौ दिन तक माता की आराधना करें। यदि व्रत करते हैं तो नियम पूर्वक संकल्प लेकर माता रानी के व्रत और करें अष्टमी या नवमी को कन्याओं को भोज कराएं।
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चामुंडा देवी मंदिर राजा की मंडी स्टेशन

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राजामंडी रेलवे स्टेशन स्थित मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
राजा की मंडी रेलवे स्टेशन स्थित चामुंडा देवी की काफी मान्यता है। भक्त मां के दरबार में खाली हाथ आते हैं, और झोली भर के ले जाते हैं। स्टेशन के पास स्थित होने से देश के कोने-कोने से लोग मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मां अपने भक्तों की मुरादें पूरी भी करती हैं। यही कारण है दिनोंदिन दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

नवरात्र भर मां के दरबार में भक्त मंडली कीर्तन भजन करती रहती है। आम दिनों में शनिवार को मां के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां चामुंडा देवी की प्रतिमा की स्थापना हुई थी। तब यहां न तो रेलवे स्टेशन था और न ही कालोनियां थी। दूर-दूर तक घना जंगल था। 1998 में मां चामुंडा देवी प्रबंध सेवा कमेटी की ओर से इसका जीर्णोद्धार किया गया।
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नालबंद प्रजापति देवी मंदिर

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श्री सिद्ध पीठ प्रजापति देवी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
महात्मा गांधी मार्ग पर नालबंद चौराहे पर स्थित प्रजापति देवी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र में मंदिर की छटा देखते ही बनते ही। मुख्य मंदिर इस मंदिर के पीछे है जो करीब 100 वर्ष पुराना है। नालबंद मंदिर की स्थापना करीब 50 वर्ष पहले की गई है। इस मंदिर में तीन बुर्जियां बनी हैं।

एक में माता की अति सुंदर प्रतिमा है। दूसरे में महावीर हनुमान और तीसरे श्रीराम दरबार और शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। प्रजापति समाज की ओर बनाए गए इस मंदिर में नवरात्र पर विशेष आयोजन होते हैं। माता का जागरण और प्रति वर्ष दक्ष कन्या की शोभायात्रा निकाली जाती है। पार्षद हेमंत प्रजापति कहते हैं कि मां के दरबार में जो भी सच्चे मन से कुछ मांगता है उसकी मुराद पूरी होती है। यह वजह से साल दर साल माता के भक्तों की भीड़ बढ़ती जा रही है। 

हाथीघाट श्री नव दुर्गा कामाच्छा देवी मंदिर

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हाथीघाट स्थित मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
हाथीघाट स्थित श्री नव दुर्गा कामाच्छा देवी मंदिर से अनगिनत भक्तों की आस्था जुड़ी हुई है। नवरात्र का तो कुछ कहना ही नहीं आम दिनों में भी भक्तों का रेला लगा रहता है। एक ही दरबार में श्रद्धालुओं को देवी नौ रूपों के दर्शन हो जाते हैं।

मंदिर के पुजारी अमित कुमार ने बताया कि यहां पूर्वज बताते हैं यहां कामाच्छा देवी की प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है बल्कि खुद जमीन से निकली है। जबकि नव दुर्गा जी की प्रतिमा करीब 70 वर्ष पूर्व पंडित रमन लाल भगत ने द्वारा स्थापित की गई थी।

इस मंदिर में नवरात्र और आम दिनों में दो बार आरती है। शाम सात और रात्रि नौ बजे। मंदिर का कपाट सुबह पांच बजे खुलता है। इसके बाद दोपहर में दो से चार बंद रहता है। चार बजे खुलने के बाद फिर साढ़े नौ बजे रात्रि को कपाट बंद होता है। 
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काली बाड़ी मंदिर, बाग मुजफ्फर खां

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कालीबाड़ी स्थित मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
कालीबाड़ी करीब 200 साल पुराना है। मंदिर में मां काली मां की प्रतिमा विराजमान है। नवरात्र में मां के भक्तों का यहां ताता लगता है। जिनकी मां भगवती मन्नत पूरी करती है।

पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि गुरु द्वारका नाथ ब्रह्मचारी को सपने में एक घट यमुना में तैरता हुआ दिखा था। गुरु ने जब सपने में दिखे स्थान को जाकर देखा, तो वह घट वहीं तैर रहा था। उसी घर को लाकर मंदिर वाले स्थान पर रखा गया। तब से यह घट यहीं जम गया और हटाने पर नहीं हटा। 
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शक्ति सुशील मंदिर, बल्केश्वर

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बलेश्वर स्थित मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
बल्केश्वर स्थित शक्ति सुशील मंदिर से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है। नवरात्र का तो कुछ कहना ही नहीं, अन्य दिनों में भी मंदिर में सुबह-शाम बड़ी संख्या में भक्तगणों की भीड़ माता के दर्शन के लिए उमड़ती है। भक्तों का कहना है कि मां के चरणों में अपार सुख मिलता है। उनके दर्शन को सभी व्याकुल रहते हैं। 

मंदिर के पुजारी ने बताया कि बल्केश्वर में मां के इस मंदिर का निर्माण सन् 1955 में माता सुुशीला देवी ने किया था। वह गुंजरावाला की रहने वाली थीं। जो कि अब पाकिस्तान में है। देवी मां की प्रतिमा जयपुर से मंगाई गई थी। मां की प्रतिमा को देखते ही भक्तगण उनकी भक्ति में लीन हो जाते हैं। मां की महिमा ऐसी है कि इस मंदिर में दर्शन के लिए मुंबई, लुधियाना, अंबाला, चंडीगढ़, दुबई, थाईलैंड जैसे दूरदराज के स्थानों से लोग यहां आते हैं।
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पथवारी देवी मंदिर पथवारी

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पथवारी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
पथवारी स्थित श्री पथवारी देवी का मंदिर आगरा में सबसे पुराना है। देवी के दर से अपार भक्तों की श्रद्धा जुड़ी हुई है। भक्त मां के दरबार में खाली हाथ आता है और झोली भर कर जाता है। नवरात्र के दौरान उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं। मंदिर के साथ ही यहां गलियां भी श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरी रहता है।

नवरात्र भर मंदिर के सामने भंडारा चलता रहता है और हजारों की संख्या में लोग माता का प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर के पुजारी डाल चंद भगत ने बताया कि बुजुर्ग बताते हैं कि मुख्य पथवारी देवी की प्रतिमा जमीन से निकली है। खुदाई के दौरान मां की मूर्ति मिली। इसके बाद यहां मंदिर का निर्माण कराया गया और करीब 60-65 वर्ष पूर्व देवी की दूसरी प्रतिमा स्थापित की गई। मां के भक्तों की तादात दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। शहर के अलावा दूरदराज से पथवारी देवी के दरबार में रोजाना हजारों की संख्या में भक्त शीश झुकाने आते हैं।

चामुंडा देवी मंदिर सुभाष पार्क 

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सुभाष पार्क स्थित चमुंडा देवी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
एमजी रोड स्थित सुभाष पार्क के पास माता चामुंडा का मंदिर प्रमुख मंदिर है। यहां माता चामुंडा की प्रतिमा के साथ-साथ अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित है। जन्माष्टमी पर यहां भव्य आयोजन होता है। नवरात्र पर माता के मंदिर का भक्ति की बरसात होती है। मंदिर में लाइन लगती है।

इसके पास ही पथवारी देवी का मंदिर है। पथवारी महारानी देवी का मंदिर की स्थापना को 350 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। भीड़ को देखते हुए मंदिर का कपाट केवल साफ सफाई के लिए बंद किया जाता है। 
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वैष्णो माता मंदिर नागरी प्रचारिणी 

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मां वैष्णो देवी मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
एमजी रोड पर आगरा कालेज के सामने नागरी प्रचारिणी में देवी माता का मंदिर है। यह मंदिर गोकुलपुरा और आसपास के क्षेत्र के लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। नवरात्र में सुबह और शाम को जबरदस्त भीड़ होती है।

माता के मंदिर में मन्नत पूरी होती है। आगरा कालेज के छात्र छात्राएं भी इस मंदिर में मत्था टेकने आते हैं। मंदिर के बाहरी हिस्से में पत्थरों पर की गई नक्काशी देखते ही बनते है। 
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