फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अधिवक्ता अकरम अपहरण: दहशत में गुजरी रातों ने खत्म की थी जीने की उम्मीद, दास्तां बताते भर आईं आंखें

Wed, 19 Feb 2020 12:13 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 9
पिता के साथ अधिवक्ता अकरम - फोटो : अमर उजाला
मुझे बोलेरो में सीट के नीचे लिटा दिया था। दो घंटे बाद एक सुनसान जगह पर बदमाश ले गए। एक घर में रखा गया। बदमाश आंखों पर पट्टी बांधकर रखते थे। मुंह पर टेप भी लगाते थे। खाने के लिए कभी रोटी सब्जी तो कभी रोटी दाल देते थे। हर दिन यही दुआ करता था कि पुलिस कब छुड़ाएगी। जैसे-जैसे दिन निकलते गए, उम्मीद भी कम होती जा रही थी। मगर, सोमवार रात को पुलिस आई और मुझे मुक्त करा लिया। यह कहते हुए अधिवक्ता अकरम अंसारी की आंखें भर आईं।
विज्ञापन

2 of 9
अधिवक्ता अपने परिवार के साथ - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि आगरा के सिकंदरा क्षेत्र से तीन फरवरी को अगवा फिरोजाबाद के अधिवक्ता अकरम अंसारी 14 दिन बाद अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त हो गए। उन्हें अगवा कर 50 लाख रुपये फिरौती मांगी गई थी। तीन बार कॉल किया गया था। पुलिस टीमों ने धौलपुर के बीहड़ में डेरा डाल रखा था। सोमवार को अधिवक्ता को धौलपुर के बाड़ी से मुक्त करा लिया गया। गिरोह के सरगना सहित छह अपहरणकर्ताओें को भी पकड़ा गया है।
विज्ञापन

3 of 9
वकील अकरम अंसारी - फोटो : अमर उजाला
अकरम अंसारी का कहना था कि जिस तरह का माहौल चल रहा है उससे लग रहा था कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त नहीं हो पाऊंगा। मगर, पुलिस ने जो काम किया, उसका तहे दिल से शुक्रिया करता हूं। पुलिस लाइन में प्रेस वार्ता के दौरान अकरम ने पुलिस अधिकारियों को मिठाई खिलाई। उनका धन्यवाद दिया।

4 of 9
पुलिस अफसरों को शुक्रिया बोलते अधिवक्ता अकरम - फोटो : अमर उजाला
अकरम अंसारी का कहना था कि वह एक समय ही खाना खाते थे। दहशत की वजह से नींद नहीं आती थी। उन्हें डर था कि परिजन अपहरणकर्ताओं की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे। उनका घर वापस जाना मुश्किल होगा। मंगलवार को पुलिस लाइन में अकरम के भाई मोउज्जम, असलम, मोहम्मद सोहेल, मुकर्रम और पिता आरिफ अंसारी आए थे। भाइयों ने अकरम को गले लगा लिया। परिवार से मिलकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। 
विज्ञापन

5 of 9
बोत्रे, रोहन प्रमोद, एसपी सिटी - फोटो : अमर उजाला
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि गैंग के सरगना उग्रसेन और सुरेंद्र पर कई मुकदमे दर्ज हैं। इनमें अपहरण और जानलेवा हमले के मुकदमे शामिल हैं। वह जेल भी जा चुके हैं। राजस्थान पुलिस की मदद से अपहरणकर्ताओं का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। 
विज्ञापन

6 of 9
अधिवक्ता के साथ पुलिस टीम - फोटो : अमर उजाला
अकरम अंसारी के भाई असलम ने बताया कि बदमाश लगातार कॉल कर रहे थे। 16 फरवरी को सिकंदरा स्थित गुरुद्वारे पर बुलाया। गाड़ी पर झंडा लगाने के लिए कह दिया। मैं अपने दोस्त के साथ किराये पर गाड़ी लेकर पहुंचा। मगर, यहां बदमाशों ने कहा कि बाड़ी आ जाओे। वहां पहुंचे तो बदमाश लगातार कॉल करके आगे बुलाते जा रहे थे। कारौली मार्ग पर आ गए। बाद में कहा कि दो सिगरेट के पैकेट लेकर आ जाना। जंगल में बैग को रखकर चले जाना। इस पर असलम ने जंगल में बैग रख दिया। इसके बाद वापस आ गए। मगर, भाई के काफी देर तक वापस नहीं आने पर असलम दहशत में आ गया। उसे डर था कि भाई को बदमाशों ने कुछ कर न दिया हो। मगर, बाद में 24 घंटे बाद अकरम को पुलिस ने मुक्त कराया तो असलम की जान में जान आई।
 
विज्ञापन

7 of 9
पुलिस ने पकड़े अपहरण के आरोपी - फोटो : अमर उजाला
अपहरण में पकड़ा गया सुरेंद्र गुर्जर पूर्व में राजस्थान के केशव और हनुमंत गैंग में काम कर चुका है। उसके साथ उग्रसेन और लाखन भी थे। मध्य प्रदेश और आगरा में अपहरण कर फिरौती वसूल चुके हैं। पहले गैंग ने सदर क्षेत्र से दंत चिकित्सक का अपहरण कर फिरौती वसूली थी।

8 of 9
एसएसपी बबलू कुमार के साथ पुलिस टीम - फोटो : अमर उजाला
बदमाशों ने फिरौती के लिए चार बार कॉल किया था। पहली कॉल पांच फरवरी की। इसके लिए सिम खेरागढ़ से किया। भरतपुर के रूपवास से कॉल किया गया। दूसरी कॉल आठ फरवरी को की। 12 फरवरी और 15 फरवरी को कॉल बाड़ी से की गई थी। कॉल करने के लिए हर बार नया मोबाइल और सिम खरीदा था। हर बार लोकेशन भी बदलते रहे।
विज्ञापन

9 of 9
पुलिस टीम को सम्मान देते एडीजी अजय आनंद - फोटो : अमर उजाला
पुलिस को मुखबिरों से बदमाशों के बारे में सुराग मिला था। फिरौती के लिए कॉल करने वाले की आवाज को रिकॉर्ड किया गया था। इसको मुखबिरों को सुनाया गया। इसके बाद पुलिस को सुराग मिला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें