आगरा कलेक्ट्रेट, तहसील, रजिस्ट्री दफ्तर, नगर निगम से लेकर लखनऊ तक भूमाफिया ने ऐसी सेंध लगाई कि बेशकीमती सरकारी भूमि के रिकॉर्ड ही गायब हो गए। कलेक्ट्रेट में घटवासन की खतौनियां गायब हैं, सदर तहसील से भू-मानचित्र (सजरा), रजिस्ट्री दफ्तर में जिल्दबही से पृष्ठ गायब हैं और नगर निगम व सिंचाई विभाग से शहर की 32 एकड़ जलमग्न भूमि का रिकॉर्ड। यही नहीं जोंस मिल जांच में अभिलेखों के रखरखाव की पोल खुलने के दो साल बाद भी दोबारा अभिलेख तैयार नहीं हो पाए, दोषियों पर कार्रवाई भी नहीं हुईं।
दिसंबर 2020 में तत्कालीन डीएम प्रभु नारायण सिंह की ओर से कराई जोंस मिल की जांच में 2596 करोड़ रुपये की जमीनों के बंदरबांट का खुलासा हुआ था। गोपनीय रिकॉर्ड भी सरकारी दफ्तरों से गायब थे। भूमाफिया व सरकारी कर्मियों की सांठगांठ से अरबों रुपये की सरकारी जमीन खुर्दबुर्द हो गई। रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण साक्ष्य के अभाव में प्रशासन कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। सबसे ज्यादा घपला मौजा घटवासन और नजूल भूमि में हुआ है। कलेक्ट्रेट से आगरा का गजेटियर गायब है, यदि क्षेत्रीय अभिलेखागार नहीं होता तो जोंस मिल कांड की जांच भी नहीं हो पाती।
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आगरा सदर तहसील
- फोटो : अमर उजाला
यहां से गायब हैं रिकॉर्ड
- कलेक्ट्रेट राजस्व अभिलेखागार : राजस्व के अधिकतर पुराने अभिलेख नष्ट हो चुके हैं। मौजा घटवासन में निजी काश्तकारों की भूमि (नॉन जेडए) खतौनियां, खेवट व खसरे गायब हैं।
- सदर तहसील भूलेख अभिलेखागार : जमींदारी के समय व जमींदारी खत्म होने के बाद के अभिलेखों का रखरखाव नहीं किया। घटवासन मौजा का बंदोबस्त सजरा भू-मानचित्र गायब है।
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आगरा नगर निगम
- फोटो : अमर उजाला
- नगर निगम का रिकॉर्ड रूम : सिंचाई विभाग ने 1918 में नगर निगम को 32.62 एकड़ जलमग्न भूमि हस्तांरित की, जिसका दोनों विभागों के पास रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
- जिला निबंधक अभिलेखागार : जिला निबंधक की जिल्द बही संख्या 50 में पेज नंबर 309 से 312 और 382 से 394 तक पृष्ठ गायब हैं। मूल पेजों को फाड़कर मिलते-जुलते पेज लगाए गए हैं।
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सदर तहसील
- फोटो : अमर उजाला
राजकीय प्रेस में भी नहीं मिला नक्शा
घटवास मौजा का राजस्व भू-मानचित्र सदर तहसील, कलेक्ट्रेट, लखनऊ स्थित राजस्व परिषद कार्यालय से लेकर राजकीय प्रिंटिंग प्रेस तक कहीं नहीं मिल रहा है। नक्शा गायब होने के बाद चकबंदी विभाग से आंशिक नक्शा ट्रेस कराया गया है। घटवासन के अलावा दो अन्य राजस्व गांव के भी भू-मानचित्र रिकॉर्ड से गायब हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में भी राजस्व विभाग का पुराना रिकॉर्ड डिजिटलाइज्ड नहीं हो सका है। पुराने रिकॉर्ड को स्कैन कर सहेजने की जरूरत थी। इसके विपरीत लेखपालों ने पुराना रिकॉर्ड स्कैन नहीं कराया न नजूल भूमि अभिलेख डिजिटल किए।
जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल ने बताया कि राजस्व अभिलेखों की फिर से जांच कराएंगे, जो भी दोषी होगा उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेंगे। रिकॉर्ड को संरक्षित करने के लिए डिजिटाइज्ड कराया जाएगा।