मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान और वृंदावन के मंदिरों में जन्माष्टमी का उत्सव 12 अगस्त को मनाया गया। मान्यताओं के अनुसार नंदगांव में कान्हा का जन्मोत्सव एक दिन पहले मनाया गया। लेकिन वृंदावन के रंगजी मंदिर में एक महीने बाद 10 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा। इसके पीछे तर्क है कि दक्षिण भारतीय मंदिरों में तिथि और नक्षत्र दोनों एक साथ हों तभी पर्व-उत्सव मनाए जाते हैं, जबकि उत्तर भारत में तिथि के अनुसार उत्सव मनाए जाते हैं।
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श्रीरंगजी मंदिर वृंदावन
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन के रंगजी मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 10 सितंबर को मनाई जाएगी। मंदिर की सीईओ अनघा श्रीनिवासन ने बताया कि दक्षिण भारत में तिथि के अनुसार ही पर्व मनाया जाए ऐसा नहीं है। दक्षिण भारतीय पंचांग में उत्सव मनाने के लिए तिथि और नक्षत्र दोनों एकसाथ होने चाहिए। तभी उत्सव और पर्व मनाया जाता है। दक्षिण भारतीय पंचांग में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र 10 सितंबर को होने के कारण श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस दिन मनाई जाएगी।
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श्री रंगजी मंदिर वृंदावन
- फोटो : अमर उजाला
भगवान कृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। कई बार ऐसा होता है ये दोनों संयोग एक साथ नहीं बन पाते। इस बार भी कृष्ण जन्म की तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं। लेकिन 27 साल बाद एक बेहद अद्भुत संयोग बन रहा है। 1993 के बाद जन्माष्टमी पर पहली बार बुधाष्टमी और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं, जो तुला, मकर और मीन राशि वालों के लिए लाभकारी हो सकता है।
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ठाकुरजी
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषाचार्य आलोक गुप्ता का कहना है कि 11 अगस्त को सुबह नौ बजकर छह मिनट के बाद अष्टमी तिथि शुरू हो गई, जो 12 अगस्त को 11 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह तीन बजकर 27 मिनट से पांच बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसलिए 11 और, 12 अगस्त दो दिन जन्माष्टमी है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर मथुरा
- फोटो : अमर उजाला
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में जन्माष्टमी का उत्सव बुधवार को मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया गया। हालांकि इस बार कोरोना के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पाबंदी है।