कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल भादो माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि 12 बजे मथुरा में भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इस साल रक्षाबंधन पर जिस तरह दो तिथियों को लेकर असमंजस रहा, उसी तरह कृष्ण जन्माष्टमी को लेकर भी है। आइये जानते हैं कि मथुरा में कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाएगी।
कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के बाल रूप की पूजा का विधान है। इस दिन कृष्ण भक्त उपवास भी रखते हैं। मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्मभूमि पर कृष्ण जन्माष्टमी 19 अगस्त को मनाई जा रही है। हालांकि नंदगांव में प्रचलित रीति के अनुसार रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। इसलिए यहां ये पर्व 20 अगस्त को मनाया जाएगा।
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जन्माष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
कृष्ण जन्मभूमि संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि 19 अगस्त की रात को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। वहीं नंदीश्वर पहाड़ी स्थित विश्व प्रसिद्ध नंदबाबा मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 20 अगस्त को मनाई जाएगी। ब्रज के अधिकांश मंदिरों में कन्हैया 19 अगस्त को जन्म लेंगे। नंदगांव में कान्हा 20 अगस्त को जन्मेंगे।
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कृष्ण जन्माष्टमी
- फोटो : Self
नंदगांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सहित अन्य त्योहार खुर गिनती रीति से मनाए जाते हैं। इसके चलते कई बार नंदभवन में जन्माष्टमी अलग तारीख को हो जाती है। यह अन्य स्थानों से मेल नहीं खाती। नंदगांव में प्रचलित रीति के अनुसार रक्षाबंधन के ठीक आठ दिन बाद ही श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। यदि कोई तिथि क्षय होती है या बढ़ती है तो अन्य स्थानों पर जन्माष्टमी की तिथि बदल जाती है।
नंदगांव में जन्माष्टमी की तिथि नहीं बदलती है। उसे रक्षाबंधन के आठ दिन बाद ही मनाया जाता है। अन्य कई त्योहार भी खुर गिनती रीति से ही निर्धारित किए जाते हैं। जन्मोत्सव के अगले दिन नवमी को नंदगांव में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन नंदगांव-बरसाना के गोस्वामीजनों द्वारा संयुक्त समाज गायन, दधि कांधों, शंकर लीला, मल्ल युद्ध, बांस बधाई आदि का आयोजन नंदभवन में किया जाता है।
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जन्माष्टमी
- फोटो : ANI
अष्टमी को रात में भजन संध्या के साथ-साथ श्रीकृष्ण के कुल का बखान ढांड़ी-ढांड़न लीला द्वारा किया जाता है। श्री नंदराय महाराज नंदबाबा मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ. भुवनेश गोस्वामी ने बताया कि नंदगांव में जन्माष्टमी 20 अगस्त को तथा 21 अगस्त को नंदोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
मान्यता है कि मथुरा जेल में जन्म के बाद श्रीकृष्ण को गोकुल ले जाया गया। कंस के भय के चलते नंदीश्वर पर्वत को सुरक्षित स्थान मान नंद बाबा सपरिवार नंदगांव आकर बस गए। यहां श्रीकृष्ण नौ साल तक रहे। मान्यता है कि कंस के भय के चलते नंदबाबा ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव भी नंदगांव में ही मनाया। इस दौरान विभिन्न देवी-देवता भी अलग-अलग रूपों में नंदगांव आए। इनका प्रमाण नंदबाबा मंदिर की समाज श्रृंखला एवं अन्य धार्मिक पुस्तकों में मिलता है।