फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हमारी धरोहर आगरा कथा: जानिए शहर की नाई की मंडी का इतिहास

Thu, 10 Dec 2020 02:00 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 5
नाई की मंडी - फोटो : अमर उजाला
जहां शहर की ज्यादातर मंडियां मुगल बादशाह अकबर के समय में बनी, वहीं नाई की मंडी इससे भी पुरानी है। यह सूर वंश के शासक शेरशाह सूरी के समय में बनी थी। 
विज्ञापन

2 of 5
नाई की मंडी - फोटो : अमर उजाला
यह शेरशाह सूरी की फौज के सिपाहियों की हजामत करने वालों ने बसाई थी। उस समय यहां एक मस्जिद थी और एक पाठशाला। इसी के आसपास नाइयों की बस्ती बस गई। इस इलाके को नाई की मंडी कहा जाने लगा।
विज्ञापन

3 of 5
नाई की मंडी बाजार - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि उन दिनों हजामत बनाना एक कला था। इतिहास में ऐसे कई किस्से हैं जिनमें इस कला से लोगों ने पुरस्कार हासिल किए। शेरशाह की फौज में मुगल, पठान, तूरानी, ईरानी और भारतीय सैनिक थे। भारतीयों में हिंदू और मुस्लिम दोनों थे। ये सभी अलग-अलग किस्म की दाढ़ी व बाल रखते थे। सभी हजामत के लिए नाई की मंडी में जाते थे।

4 of 5
नाई की मंडी बाजार - फोटो : अमर उजाला
अंग्रेजों के समय में बदला काम 
अंग्रेजों के समय में फौजों में बिना दाढ़ी वाले सिपाही रखे गए। बाल काटने और दाढ़ी बनाने के लिए नए किस्म के अंग्रेजी औजार आ गए। एक  ही तरह की बाल कटिंग होने लगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
नाई की मंडी थाना - फोटो : अमर उजाला
फौज के साथ ही अलग से नाई रहने लगे। इससे मंडी में नाइयों का काम ठंडा पड़ गया। धीरे धीरे नाई की मंडी का सिर्फ नाम रह गया। इसकी जगह चमड़े का व्यवसाय जोर पकड़ता चला गया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें