कासगंज जिले में पुलिस ने सिपाही की हत्या के मुख्य आरोपी शराब माफिया मोती सिंह का खात्मा कर दिया है। इसके साथ ही उसका कच्ची शराब का धंधा भी बंद हो गया, लेकिन गंगा और काली नदी के खादर इलाके में धधकती कच्ची शराब की भट्ठियां कब बुझेंगी? यह सवाल अभी भी बना हुआ है। नशे के इस कारोबार को जड़ से खत्म करना पुलिस और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती से कम नहीं है। जिले में गंगा और काली नदी की खादर में 50 से अधिक ऐसे गांव हैं, जहां कच्ची शराब की भट्ठियां धधकती हैं। यहां तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं है।
भट्ठियां ऐसे खादर के गड्ढे के इलाकों में संचालित होती हैं, जहां आमतौर पर वाहन नहीं पहुंच सकते। कच्ची शराब के कारोबार के लिए कई गांवों में नेटवर्क फैला हुआ है। नरदौली, नगला हीरा, गांव गंगसारा, अजीतनगर, दीवान नगला, खड़ऊआ, नगरिया, मोती नगर, ताली, महदवा, भैंसोरा, मनौटा, अहरौली, पबसरा, महावर, मगथरा श्यामपुर, सेवरनगला, नगला छत्ता, जखेरा जैसे गांव हैं, जहां अभी तक पुलिस और प्रशासन कच्ची शराब के नेटवर्क को नहीं तोड़ पाया। सिढ़पुरा की घटना के बाद शराब माफिया के हौसले जरूर टूटे हैं।