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Kargil Vijay Diwas 2020: अंतिम सांस तक लड़े थे शहीद रविकरन, शरीर में लगीं आठ गोलियां, फिर भी ढेर किए 10 घुसपैठिए

Sun, 26 Jul 2020 12:24 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नौहझील (मथुरा)
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कारगिल विजय दिवस: शहीद रविकरन सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कारगिल युद्ध में मथुरा जनपद के गांव नावली के लाल रविकरन ने 12000 फीट की ऊंचाई पर अंतिम सांस तक लड़ते हुए पाकिस्तान के 10 घुसपैठियों को मार गिराया था। कारगिल शहीद नायक रविकरन सिंह कर्नल कुशल सिंह ठाकुर की टुकड़ी में सबसे आगे थे। 4 जुलाई, 1999 को जब रविकरन की शहादत खबर मिली तो पूरा गांव गमजदा हो गया। गर्व इस बात का था कि वीर सपूत ने देश की खातिर अपना बलिदान दिया है। 21वें कारगिल विजय दिवस पर गांव के लोगों ने शहीद रविकरन को पुष्प अर्पित कर नमन किया।  
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कारगिल विजय दिवस - फोटो : सोशल मीडिया
नौहझील के गांव नावली निवासी विजेंद्र सिंह के पुत्र रविकरन वर्ष 1985 में सेना में भर्ती हुए थे। ट्रेनिंग के बाद वो 18 ग्रेनेडियर लड़ाकू यूनिट में सिपाही बने। कारगिल की लड़ाई में वो जम्मू-कश्मीर भेजे गए। उनकी यूनिट 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित टाइगर हिल पर लड़ रही थी। पाक सैनिक और घुसपैठियों से आमने-सामने की लड़ाई व गोलाबारी चल रही थी। 
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कारगिल विजय दिवस
कर्नल कुशल ठाकुर की यूनिट के जवान बचाव करते हुए चोटियों से हमला कर रहे थे। इसमें नायक रविकरन सिंह लगातार गोलियां दाग रहे थे। इसी दौरान घुसपैठियों की ओर से हो रही फायरिंग में रविकरन सिंह के हाथ में, सीने के साथ शरीर में आठ गोलियां लगीं। लड़ते हुए वो वीरगति को प्राप्त हो गए। सात जुलाई 1999 को उनका पार्थिव शरीर मथुरा लाया गया। गांव नावली में अंतिम संस्कार किया गया।

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कारगिल विजय दिवस: शहीद रविकरन सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
रविकरन की शहादत पर रो पड़ा था पूरा क्षेत्र
21 वर्ष पहले जब कारगिल की लड़ाई चल रही थी, उस दौरान लोग टीवी पर समाचार देखने को जुटे हुए थे। गांव नावली निवासी मनोज प्रधान एवं रामगोपाल चौधरी बताते हैं कि उस वक्त गांव के काफी लोग रेडियो पर समाचार सुन रहे थे। चार जुलाई की शाम जिला प्रशासन और नौहझील पुलिस ने रविकरन की शहादत की सूचना दी, तो नावली गांव के साथ-साथ पूरा नौहझील क्षेत्र रो पड़ा था। 
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शहीद सोरन सिंह की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
सोरन सिंह ने दुश्मनों का डट कर किया था मुकाबला
गोवर्धन निवासी वीर नारी कमलेश कुंतल कारगिल युद्ध में अपने पति सोरन सिंह की शहादत को याद कर गौरवान्वित हो उठती हैं। नगला उम्मेद की नगरिया निवासी सोरन सिंह ने कारगिल युद्ध में अपनी शहादत देकर वीरता का परिचय दिया था। वे अंतिम सांस तक लड़े और कई पाकिस्तानी घुसपैठियों को मार गिराया। परिजनों ने बताया कि उनकी पोस्टिंग जाट रेजीमेंट में मई 1990 में हुई थी। वे कारगिल युद्ध को भेजे गए। दुर्गम पहाड़ियों में रैंगते हुए धड़ाधड़ गोलियां दुश्मन के सीने में ठोक दी। सोरन सिंह के सीने व सिर में दुश्मनों की कई गोलियां लगीं। 26 जून 1999 को वे शहीद हो गए। 
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शहीस सोरन सिंह का परिवार - फोटो : अमर उजाला
शहीद सोरन सिंह की पत्नी कमलेश कुंतल ने बताया कि नगला उम्मेद की नगरिया से उनके पति सेना में देश की सेवा के लिए भर्ती हुए। 28 वर्ष की उम्र में शहीद हो गए। उस दौरान पुत्र विवेक (5 वर्ष), पुत्री डॉली (3 वर्ष) और सबसे छोटे पुत्र रोहित की उम्र छह माह थी। सरकार ने गोवर्धन में गैस एजेंसी आवंटित की। गिरिराज जी के आशीर्वाद से परिवार का पालन पोषण किया। विवेक व पुत्री डॉली की शादी हो चुकी है। रोहित पढ़ाई कर रहा है। उनके एक नाती तनय सिंह है।
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