ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सोमवार को सहस्त्रधारा स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ गए हैं। भगवान जगन्नाथ अब 15 दिनों तक आराम करेंगे। इस दौरान भगवान का जड़ी बूटियों, औषधियों से उपचार किया जाएगा। एक वैद्य प्रतिदिन भगवान की देखभाल करेगा। अगली स्लाइड्स में जानिए आस्था और भक्ति की इस अनोखी परंपरा के बारे में...
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वृंदावन में ज्ञान गुदड़ी स्थित जगन्नाथ मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में ज्ञान गुदड़ी स्थित जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ का फलों के रस, नदियों के जल, पंचामृत एवं 108 कलशों से सहस्त्रधारा अभिषेक हुआ। स्नान के बाद भगवान को बुखार आ गया। इसके चलते 15 दिनों के लिए मंदिर के पट बंद हो गए। अब चार जुलाई को मंदिर के पट खुलेंगे।
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भगवान जगन्नाथ का अभिषेक करते मंदिर के पुजारी
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर के महंत ज्ञानप्रकाश ने बताया कि मान्यता के अनुसार ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ को सहस्त्रधारा स्नान कराया जाता है। इस स्नान के बाद भगवान बीमार हो जाते हैं। 15 दिनों के लिए मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान मंदिर में घंटे नहीं बजते और न ही अन्न का भोग लगता है। भगवान को केवल आयुर्वेदिक काढ़ा और फलों का रस दिया जाता है।
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मंदिर में सजाया गया फूल बंगला
परंपरानुसार भगवान की बीमारी की जांच के लिए प्रतिदिन वैद्य (पुजारी) भगवान जगन्नाथ की देखभाल करते हैं। दिन में दो बार आरती होती है लेकिन इससे पहले भगवान को काढ़े का भोग लगाया जाता है। प्रतिदिन शीतल लेप लगाया जाता है। भगवान जगन्नाथ को रात में मीठा दूध भी निवेदित किया जाता है। भगवान के ठीक होने पर उस दिन जगन्नाथ यात्रा निकलती है।
मथुरा में सोमवार को श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर भगवान जगन्नाथ की परंपरागत स्नान यात्रा निकाली गई। जन्मस्थान के भागवत भवन स्थित जगन्नाथ मंदिर में शाम 5 बजे स्नान यात्रा का शुभारंभ वैदिक रीति रिवाज के तहत हुआ। फलभोग के बाद ठाकुर जी के श्रीविग्रह को परिक्रमा कराने बाद पंचामृत से दिव्य अभिषेक कराया गया।