आठ सदस्यीय जांच में 2596 करोड़ रुपये की 128 बीघा सरकारी व पट्टे की जमीन को खुर्दबुर्द करने का मामला प्रकाश में आया था। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शून्यकाल में बहस के लिए सवाल लगाया है।
आगरा की जीवनी मंडी स्थित जोंस मिल की जमीन के घोटाले का मामला अब राज्यसभा में गूंजेगा। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने इस मामले को शून्यकाल में बहस के लिए सवाल लगाया है। व्यापक चर्चा की मांग की गई है। डीएम प्रभु एन सिंह के आदेश पर गठित आठ सदस्यीय टीम ने जांच में 2596 करोड़ रुपये कीमत की करीब 128 बीघा जमीन के बंदरबांट का खुलासा किया था। जिसके बाद जांच रिपोर्ट धूल फांक रही है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उच्च सदन के महासचिव को नोटिस भेजकर जोंस मिल मामले में बहस की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि आगरा में अंग्रेजों के जमाने की जोंस मिल नाम से एशिया की सबसे बड़ी कपड़ा मिल थी। आजादी के बाद यह जमीन सरकार की होनी चाहिए थी लेकिन वर्तमान में भूमाफिया के कब्जे में है। जांच में अवैध कब्जों और 2596 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हो चुका है, लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं हुई।
विज्ञापन
2 of 6
जोंस मिल में पड़ा मलबा
- फोटो : अमर उजाला
दो साल पहले किया था बम विस्फोट
19 जुलाई 2020 को जोंस मिल नंबर-4 कपाउंड में 15 किलो के बम से विस्फोट किया गया था। जिसके बाद आप के पूर्व जिलाध्यक्ष कपिल वाजपेयी ने एसएसपी व डीएम को भूमाफिया की शिकायत दर्ज कराई थी। तत्कालीन एसएसपी बबलू कुमार की संस्तुति पर डीएम प्रभु एन सिंह ने तत्कालीन एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव के नेतृत्व में आठ सदस्यीय टीम से जांच कराई। टीम ने दिसंबर 2020 में 2596 करोड़ रुपये की जमीन के बंदरबांट का खुलासा किया था। इसके बाद डीएम ने राजेंद्र जैन उर्फ रज्जो, हिमांशु अग्रवाल उर्फ चुनमुन और सरदार कंवलदीप सिंह को भूमाफिया घोषित किया। इसके बाद से अब तक भूमाफिया के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
विज्ञापन
3 of 6
जोंस मिल के इस हिस्से में हुआ था ब्लास्ट
- फोटो : अमर उजाला
ऐसे हुआ था बंदरबांट
सन 1936 में ग्रीक व्यापारी मेजर एयू जोन ने तत्कालीन कलेक्टर व जमींदारों से करीब 100 बीघा जमीन पट्टे पर लेकर कपड़ा व फ्लोर मिलें स्थापित कीं। एयू जोन की मृत्यु के बाद 1965 में साझेदार हीरालाल पाटनी, गंभीरमल पांडया एवं मुन्नीलाल मेहरा ने जमीन को बेचना शुरू कर दिया, जबकि बिक्री अवैध थी। पिछले 50 वर्षों में साझेदार व उनके वारिसों ने जमीन बेचकर अकूत संपत्तियां एकत्र कीं। उनका सहयोग भूमाफिया ने किया।
4 of 6
जोंस मिल में सरकारी जमीन
- फोटो : अमर उजाला
सफेदपोश भी शामिल
जोंस मिल में बिना किसी हक-हकूक के फर्जी बैनामे हुए। जिन्हें प्रशासन ने शून्य घोषित कर दिया। बेशकीमती सरकारी व पट्टे की जमीन पर मार्केट, बिल्डिंग, अपार्टमेंट व मॉल बन गए। जमीन को खुर्दबुर्द करने वालों में सत्तारूढ़ दल के कई सफेदपोश भी शामिल हैं। एक विधायक का रिश्तेदार भी भूमाफिया घोषित है। एक विधायक का भूमाफिया की बिल्डिंग में कार्यालय है।
विज्ञापन
5 of 6
जोंस मिल की जगह
- फोटो : अमर उजाला
आर्थिक अपराधा शाखा की जांच ठप
मामले का खुलासा होने के बाद डीएम ने भूमाफिया के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई के लिए एसपी सिटी के नेतृत्व में एसआईटी बनाई। जोंस मिल के 10 से अधिक खसरों में जमीनों की खरीद-फरोख्त, बिजली, पानी कनेक्शन, मानचित्र स्वीकृति पर रोक लगा दी गई। परंतु इसके बाद भूमाफिया हिमांशु अग्रवाल की पत्नी के आवेदन पर शासन ने जांच एसआईटी से आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को स्थानांतरित कर दी। जहां एक साल से जांच ठप है।
आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट में विचाराधीन है मामला
मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। जिलाधिकारी के आदेश पर हाईकोर्ट ने स्टे दिया है। हाईकोर्ट में पैरवी कराई जा रही है। निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी आगरा