आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। ताजनगरी में ऐसी कई युवतियां हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष की बदौलत नई पहचान बनाई है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अमर उजाला 'आगरा की शक्ति' का परिचय करा रहा है। दिव्यांग सोनिया शर्मा ने अपने अडिग इरादों से अचूक निशाना साधकर पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। वहीं राजपुर चुंगी की हिमानी बुंदेला के इरादे भी हिमालय जैसे हैं। दोनों ने अपने दम पर अलग पहचान बनाई है।
बल्केश्वर की दिव्यांग सोनिया शर्मा अपने दम ओर मेहनत के बल पर शूटिंग में वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। दिव्यांगों और महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं सोनिया शर्मा केवल 26 साल की हैं। सोनिया ने वर्ष 2017 में बैंकाक में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। एक साल बाद वर्ष 2018 में दुबई में हुई पैरा शूटिंग वर्ल्ड कप चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल में आठवीं रैंक प्राप्त की।
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दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
सोनिया बताती हैं कि उनके पिता ठाकुर दास का सपना था कि वह एक दिन शूटिंग में देश का नाम रोशन करें। पिता ने ही उनके हाथ में पिस्टल थमाई, लेकिन कुछ समय बाद पिता की मौत हो गई। तब पिता को असली श्रद्धांजलि देने का संकल्प लिया और स्वर्ण पदक जीता।
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दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
पिता की मौत के बाद घर के आर्थिक हालात भी खराब हो गए, लेकिन मां जनक शर्मा और बड़ी बहन ने साथ दिया तो हौसलों को फिर से उड़ान मिल गई। शूटिंग की शुरूआत रायफल से की। रायफल चलाने के लिए दूसरे हाथ की जरूरत पड़ती है। सिर्फ बाएं हाथ से रायफल साधना मुश्किल हुआ, पर दर्द झेलते हुए उन्होंने कड़ा अभ्यास किया।
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दिव्यांग शूटर सोनिया शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
सोनिया ने सपना पूरा करने के जज्बे ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। वह पिस्टल में पदक जीतीं, लेकिन रायफल से किया अभ्यास उसकी बुनियाद बना। शूटर सोनिया शर्मा ने बताया कि उनका सपना है कि वह ओलंपिक में देश के लिए खेले और गोल्ड मेडल भारत के नाम करें। इसके लिए वह पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण में जुटी हुई हैं।
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अमिताभ बच्चन के साथ केबीसी विनर हिमानी बुंदेला
- फोटो : अमर उजाला
गुरु गोविंद नगर, राजपुर चुंगी की हिमानी बुंदेला ने बचपन से ही बड़े सपने देखे। नौवीं कक्षा में एक सड़क हादसे में उनकी आंखों की रोशनी कम हो गई, मगर हिमानी का हौसला हिमालय से कम नहीं था। उन्होंने स्नातक, शिक्षा स्नातक करने के बाद केंद्रीय विद्यालय में अध्यापन शुरू कर दिया। केबीसी-2 में एक करोड़ रुपये जीतकर चर्चा में आईं हिमानी ने आईकॉन बनकर विधानसभा चुनाव में मताधिकार के लिए जागरूक करने की मुहिम चलाई।
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केबीसी विनर हिमानी बुंदेला
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पिता विजय बुंदेला बताते हैं कि जब हिमानी कक्षा नौ में पढ़ रही थी। तभी साइकिल से स्कूल से लौटते वक्त गाड़ी की टक्कर से आंखों में गिट्टियां चुभ गई। हादसे से रोशनी कम हुई तो फिर लाख इलाज कराने के बाद वापस नहीं आ सकी। आगे की पढ़ाई करना मुश्किल हो गया। मोटे चश्मे के बाद किताब पर आई लैंस लगाकर पढ़ती। स्नातक के बाद बीएड भी किया। लोग मजाक भी उड़ाते मगर परवाह नहीं की। तीन साल पहले केंद्रीय विद्यालय में बतौर शिक्षिका जॉब शुरू की। अब केवी-1 में बच्चों को गणित व अंग्रेजी पढ़ाती हैं।
हिमानी ने बताया कि उनका सपना दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना है। इसके लिए वह दिव्यांग छात्रों के लिए आईएएस, पीसीएस समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग शुरू करना चाहती हैं। इसके लिए प्रयास भी कर रही हैं।