बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण और कब्जे हो गए। जोंस मिल की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट में ये खुलासा होने के बाद अब सिंचाई विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
आगरा शहर में घटवासन की नहर भी चोरी हो गई और जिम्मेदार सोते रहे। खसरा 2078 में करीब 74 हजार वर्ग मीटर सिंचाई विभाग की जमीन भूमाफिया के चुंगल में फंस गई। बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण, अतिक्रमण और कब्जे हो गए। जोंस मिल की जांच कर रही कमेटी की रिपोर्ट में ये खुलासा होने के बाद अब सिंचाई विभाग जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।
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जोधपुर झाल
- फोटो : अमर उजाला
कीठम में जोधपुर झाल स्थित आगरा कैनाल से निकली सिकंदरा नहर ब्रिटिश पीरियड में जलमार्ग हुआ करती थी। हिंडन-यमुना कैनाल के नाम से मशहूर इस नहर से ही जोंस मिल का व्यापार होता था। 1970 तक टूटी-फूटी नहर मौजूद थी। डीएम के आदेश पर जांच कर रही कमेटी सदस्य ने बताया करीब 74 हजार वर्ग मीटर नहर भूमि पर अवैध निर्माण व कब्जे हुए हैं। सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता सौरभ गिरी ने बताया कि विभाग ने यहां निर्माण के लिए किसी को एनओसी जारी नहीं की। जितने भी निर्माण हुए वह अवैध हैं। इन्हें खाली कराया जाएगा।
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जोंस मिल
- फोटो : अमर उजाला
यमुना व्यू और नालंद अपार्टमेंट की एनओसी की जांच
जोंस मिल के खसरा 1739 में बने यमुना व्यू अपार्टमेंट और नालंदा ग्रांड अपार्टमेंट के नक्शों व एनओसी की जांच शुरू हो गई है। एडीएम प्रशासन ने दोनों अपार्टमेंट की जांच कमेटी को सौंपी है। जांच कमेटी सदस्य के मुताबिक ये दोनों बिल्डिंग घटवासन की नजूल भूमि हैं।
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जोंस मिल की जगह
- फोटो : अमर उजाला
जमीदारों के वारिशों को अंतिम नोटिस
जोंस मिल के लिए जमीन पट्टे पर देने वाले जिन जमीदारों ने करार किए उनके वारिशों से जांच कमेटी ने जमीदारी से संबंधित प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए अंतिम नोटिस जारी किए हैं। एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने बताया कि जमींदारों के वारिशों ने जमीन पर अपना हक जताया है। उनके पास जमीन कैसे पहुंची।
जोंस मिल के इस हिस्से में हुआ था ब्लास्ट
- फोटो : अमर उजाला
जमींदारों के पास कितनी जमीन के पट्टे ब्रिटिश पीरियड में हुए, उनसे साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा है। दो बार उनसे साक्ष्य मांगे गए, लेकिन किसी ने प्रस्तुत नहीं किए। पांच लोगों को अब तीन दिन में दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए अंतिम मौका दिया है।