वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दूसरे दिन भी भक्तों की भीड़ उमड़ी। रविवार को मंदिर के बाहर करीब आधा किलोमीटर लंबी भक्तों की कतार लग गई। थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजेशेन के बाद भक्तों को मंदिर में प्रवेश दिया गया। बता दें कि सोमवार से बांकेबिहारी मंदिर के पट फिर से बंद कर दिए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन ने भक्तों की भीड़ के कारण यह निर्णय लिया है।
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बांकेबिहारी दर्शन पाकर भावुक हुए भक्त
- फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस महामारी के कारण मार्च माह में ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट भक्तों के लिए बंद कर दिए गए थे। 17 अक्तूबर को मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। एक दिन में 400 श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था बनाई गई, लेकिन पहले दिन ही करीब 20 हजार भक्त वृंदावन पहुंचे थे। इनमें से अधिकांश लोगों ने रात तक दर्शन किए। इस दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं हुआ।
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रविवार को तड़के ही लग गई भक्तों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
रविवार को भी ठाकुर बांकेबिहारी के दर्शन को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिर के बाहर करीब आधा किलोमीटर तक भक्तों की कतार लगी रही। हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश से आए ठाकुर बांकेबिहारी के भक्त अपने आराध्य के दर्शन को आतुर दिखाई दिए। कोरोना के खौफ पर आस्था भारी दिखी।
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बांकेबिहारी मंदिर के बाहर भक्तों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
एक-एक कर भक्तों को तीन नंबर गेट से मंदिर में प्रवेश दिया गया। चार नंबर गेट से उन्हें बाहर निकाला गया। इससे पहले इन सभी भक्तों की थर्मल स्क्रीनिंग हुई। इस दौरान मंदिर में पुरुष और महिला सुरक्षा गार्ड मुस्तैद नजर रहे। उधर, दोपहर बाद भक्तों की भीड़ को देखते हुए ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के पट फिर से बंद करने निर्णय जारी कर दिया गया।
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बांकेबिहारी मंदिर के बाहर भक्तों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि पोर्टल पर अधिक लोड होने के कारण ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में अब 19 अक्तूबर से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था शुरू होने तक मंदिर अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगा।
मंदिर प्रबंधक ने बताया कि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, दर्शन की सुगम व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के सहयोग से करने के बाद ही मंदिर को खोला जाएगा। इस दौरान ठाकुरजी को भोग, राग, सेवा, पूजा पूर्व की भांति होती रहेगी। संबंधित सेवायत के साथ मंदिर के कर्मचारी और भवन की मरम्मत के लिए नियुक्त कार्यदायी संस्था के कर्मचारी ही प्रवेश कर सकेंगे।