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यमुना का तट रहा सूना, बेजुबानों ने ऐसे बुझाई अपनी प्यास

Mon, 05 Jun 2017 09:26 PM IST
टीम डिजिटल आगरा
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यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में मथुरा सोमवार को सबसे गर्म जिला रहा। सूरज ने ऐसे शोले उगले कि तापमान बढ़कर 49 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। न घर में चैन मिला और न ही बाहर सुकून। एसी और कूलर तो बेमतलब के हो गए। यमुना के विश्राम घाट पर भी दोपहर में कोई श्रद्धालु नहीं आया। 
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होलीगेट - फोटो : अमर उजाला
रविवार को 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया था। जिसे भी मौसम वैज्ञानिकों ने अब तक सर्वाधिक बताया था। सोमवार को तो सवेरे से ही आसमान से शोले बरसने लगे। बाहर निकलते ही चक्कर आ रहे थे लोगों को। क्या मुहल्ले और क्या कालोनी, सभी जगह गर्मी का कर्फ्यू सा लगा रहा। मथुरा के हृदयस्‍थल होलीगेट पर पूरी तरह से सन्नाटा रहा। 
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वृंदावन - फोटो : अमर उजाला
फरह में स्थित केंद्रीय बकरी अनुसंधान केंद्र के मौसम विभाग ने जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक सोमवार को अनुसंधान केंद्र के आसपास का तापमान 49 डिग्री तक रहा है। मौसम वैज्ञानिक डा. एम. रामाचंद्रन ने बताया कि यमुना के किनारे के आसपास के इलाके का ये तापमान है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि सोमवार को प्रदेश के जो सबसे गर्म जिले रहे हैं उनमें मथुरा सबसे आगे है। बांदा का तापमान 48 डिग्री था जबकि झांसी और वाराणसी का तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस ही रहा। 

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मथुरा - फोटो : अमर उजाला
सरकारी दफ्तरों में फरियादी भी अन्य दिनों के मुकाबले कम ही पहुंचे। जिलाधिकारी और एसएसपी आफिस पर भी कम ही लोग नजर आए। हर जगह गर्मी की ही चर्चा होती रही। शहर के व्यस्त क्षेत्र होलीगेट, छत्ताबाजार, राजाधिराज बाजार, स्वामी घाट, चौक बाजार आदि क्षेत्रों में दोपहर के समय धूप और लू का कर्फ्यू लगा रहा। 
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फिरोजाबाद - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद में गरमी के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। इसका सीधा असर बिक्री पर पड़ रहा है। खासतौर पर खानपान के सामान की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है। 
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एक बूंद के लिए - फोटो : सुनील कुमार
वहीं एटा-कासगंज में तापमान 47 डिग्री पहुंचने के कारण हर कोई व्याकुल था। 14  किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली गर्म हवा राहगीरों को तो झुलसा ही रही थी। जीव जंतुओं को भी व्याकुल कर दिया। रेलवे स्टेशन पर बंदर कुछ इस तरह अपना गला तर करते नजर आए। 

 
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एक बूंद के लिए - फोटो : अमर उजाला
वहीं गिलहरी भी पानी की एक बूंद के लिए टंकियों के आसपास ही मंडराती रहीं। जितना भी पानी मिला उतने से ही उन्होंने संतोष कर लिया। वहीं पानी की तलाश में बंदर इस टंकी से उस टंकी पर कूदते नजर आए।  
 
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