14 सितंबर 1949 को राजभाषा बनी हिंदी का डंका विश्व पटल पर 4 अक्तूबर 1977 में बजा, जब तत्कालीन विदेशमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया। उस वक्त अटल बिहारी के पैतृक गांव बटेश्वर में उत्सव मनाया गया था। जहां अटल बिहारी वाजपेयी के हिंदी में भाषण का वे क्षण गौरव की अनुभूति कराते हैं, वहीं बटेश्वर में वीरान पड़ा उनका आंगन आंखों में आंसू भर देता है।
साहित्यकार डॉ. शिवशंकर कटारे ने बताया कि 4 अक्तूबर 1977 में विदेशमंत्री और सितंबर 2000 में प्रधानमंत्री के तौर पर अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस पर हमारा दायित्व है कि राजभाषा के विकास के प्रयास हों।
साहित्यकार डॉ. बीपी मिश्र ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने बटेश्वर ही नहीं पूरे देश को गौरवान्वित कर हिंदी का मान बढ़ाया था। अटलजी का सानिध्य पाने वाले बटेश्वर के विनोद जैन कहते हैं कि तब रेडियो पर उनका भाषण सुना था।
राम सिंह आजाद ने बताया कि जब अटलजी ने संयुक्त राष्ट्र संघ को हिंदी में भाषण दिया, तब बटेश्वर में उत्सव जैसा माहौल था। हिंदी को मिले सम्मान पर मिठाई बांटी गई थी। हिंदी का मान बढ़ाने वाले अटल का आंगन वीरान पड़ा है। उनके स्मृति स्थल सहेजे जाने चाहिए।
इसी स्कूल में पढ़े थे अटल बिहारी वाजपेयी
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बटेश्वर की गलियां में अटल बिहारी वाजपेयी का बचपन बीता। गांव के जिस मंदिर में उन्होने पूजा की, जिस स्कूल में भविष्य का ककहरा सीखा, उसकी भी सुध लेने वाला कोई नहीं है। गांव में आज भी पूर्व प्रधानमंत्री के रिश्तेदार राकेश वाजपेयी सहित कई लोग रहते हैं।