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प्राचीन ताम्र निधियों का राज: हड़प्पा सभ्यता के अंत के बाद नई सभ्यता के रहस्य खोलेंगे मिट्टी के बर्तन और भट्ठियां

Sat, 02 Jul 2022 12:35 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमित कुलश्रेष्ठ, आगरा
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प्राचीन ताम्र निधियों का राज - फोटो : अमर उजाला
खेतों से 3800 से 4000 वर्ष पुरानी ताम्र निधियां तो कई जगह निकलीं, लेकिन मैनपुरी के गांव गणेशपुर में पहली बार 77 ताम्र निधियों के साथ मिट्टी के बर्तन और बर्तन पकाने वाली भट्ठियां मिली हैं, जो इतिहास के नए रहस्यों का खुलासा करने जा रहीं हैं। साथ ही पहली बार 39 इंच लंबी तांबे की बनी तलवार और चार हुक वाला भाला भी मिला है। हड़प्पा सभ्यता के अंत के समय गंगा और यमुना घाटी के बीच मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगढ़, कानपुर में पनप रही सभ्यता के नए रहस्य इन ताम्र निधियों, ओसीपी और भट्ठियों की जांच में सामने आ रहे हैं। सिनौली की तरह गणेशपुर गौरवशाली इतिहास के दरवाजों को खोल रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा सर्किल गणेशपुर गांव से लाई गई सभी ताम्र निधियों की जांच कर रहा है। जांच में चौंकाने वाले कई रहस्य सामने आए हैं। 
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मौके पर जांच करती एएसआई की टीम - फोटो : अमर उजाला
गांव के टीले से जो ताम्र निधियां मिलीं, उनमें देश में पहली बार ताम्रयुग की सबसे लंबी 39 इंच की तलवार मिली हैं। इसी तरह चार हुक और चार धार वाला भाला (हार्पून) प्राप्त हुआ है, जो सबसे अनूठा है। जांच में इन हथियारों में 98 फीसदी कॉपर पाया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारियों के मुताबिक जिस जगह से ताम्र निधियां और दो भट्ठियों के साथ मिट्टी के बर्तन मिले हैं, वहां प्राचीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हो सक ते हैं। एएसआई के केमिकल ब्रांच के निदेशक ने सफाई के लिए इन ताम्र निधियों को मुख्यालय मंगाया है।
 
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खुदाई में मिलीं ताम्र निधियां - फोटो : अमर उजाला

हाथी या घोड़े पर सवार होकर करते थे युद्ध

तांबे की 39 इंच लंबी तलवार सबसे अनूठी है, जो पहली बार ताम्र निधियों में मिली है। बेहद पैनी धार वाली तलवार पर जबरदस्त निशान हैं जो युद्ध के दौरान दूसरी तलवारों के टकराने के हैं। एएसआई अधिकारियों के मुताबिक इतनी लंबी तलवार के मायने ये हैं कि यह पैदल नहीं, बल्कि घोड़े पर सवार होकर या हाथी पर सवार होकर लड़ने के लिए थी। गणेशपुर की अलावा कहीं भी इतनी लंबी तांबे की तलवार नहीं मिली है। इस पर नीचे हुक बने हुए हैं, ताकि लड़ते हुए दुश्मन की तलवार नीचे हाथ न काट दे। किसी में बायीं तो किसी में दायीं ओर यह हुक हैं। भालों के नीचे रिंग है, जो किसी में फं साकर हमले के काम आती थी।

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खुदाई में मिला भाला - फोटो : अमर उजाला

ग्रामीणों ने घिसकर देखीं तलवारें, भाले

गणेशपुर में पहले दिन 39 ताम्र निधियां मिली, लेकिन अब इनकी संख्या 77 है। कई ग्रामीण इन्हें ले गए जो बाद में पुलिस के दबाव पर देने आ गए। हालांकि कई ताम्र निधियां अब भी ग्रामीणों के पास होने की आशंका है। जो भाले, तलवारें एएसआई के पास हैं, उन्हें ग्रामीणों ने घिसकर देखा था कि वह किस धातु की हैं। इन तलवारों की धार इतनी पैनी हैं कि जंग लगने पर भी कागज को काट रही हैं।
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एएसआई कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला

खेत के पास 50 से ज्यादा लोगों की थी बस्ती

जिस टीले से ताम्र निधियां और मिट्टी के बने गेरुए बर्तन (ओसीपी-ओक रे कलर्ड पॉटरी) मिले हैं, वहां 50 से ज्यादा लोगों की बस्ती होने का अनुमान है। पक्की ईंटों के साथ यहां बर्तन पकाने वाली दो भट्ठियां मिली हैं, जिनमें एक 2.25 मीटर व्यास और 60 सेमी गहराई की है, जबकि दूसरी 2.6 फुट चौड़ी और 2.50 फुट गहरी है। एएसआई ने यहां एक फुट गहरी ट्रेंच लगाकर उत्खनन कराया, जिसमें वैसे ही गेरुए बर्तनों के टुकड़े मिले, जैसे सैफई में 1970 के उत्खनन में मिले थे।
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मौके पर की गई खोदाई - फोटो : अमर उजाला

टीले के चारों ओर झील के संकेत

गणेशपुर साइट के पास गांव से गांव के बीच विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है। यहां उत्खनन की योजना है ताकि जो ताम्र निधियां, ओसीपी, भट्ठियां मिलीं हैं, उनमें तारतम्य स्थापित किया जा सके। साइट के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से की ओर बड़ी झील के संकेत है, जहां से पानी की उपलब्धता थी। इन सभी की जानकारी जुटाई जा रही है। - डॉ. राजकुमार पटेल, अधीक्षण पुरातत्वविद
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प्राचीन ताम्र निधियों का राज - फोटो : अमर उजाला

सफाई के लिए मांगा है

जो ताम्र निधियां मिलीं हैं, वह बेहद प्राचीन हैं। यह चार हजार साल पुरानी हो सकती हैं। इनकी सफाई के लिए हमने इन्हें मांगा है ताकि केमिकल क्लीनिंग के बाद इनसे जुड़ी जानकारियां मिल सकें। - डॉ. एमके भटनागर, निदेशक, रसायन शाखा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण
 
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खोदाई में मिली ताम्र निधि - फोटो : अमर उजाला

मिलेंगी नई जानकारियां

ये अस्त्र-शस्त्र तब के हैं, जब ढलाई कला विकसित हो चुकी थी। यह लगभग 3800 साल पुराने हैं इनका ओसीपी के साथ मिलना कई नई जानकारियां देगा। - वसंत कुमार स्वर्णकार, निदेशक, एएसआई
 
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