गुरु पूर्णिमा पर मथुरा के गोवर्धन में रविवार को मुड़िया संतों ने 500 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन करते हुए धूमधाम से मुड़िया शोभायात्रा निकाली। हालांकि इस बार कोरोना वायरस के कारण शोभायात्रा में ज्यादा श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाए। शोभायात्रा पर जगह-जगह पुष्पवर्षा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण से कोरोना महामारी के सर्वनाश के लिए प्रार्थना की।
विज्ञापन
2 of 6
मुड़िया शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला
मुड़िया शोभायात्रा महंत रामकृष्ण दास के निर्देशन में गोवर्धन के चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी के समाधि स्थल से शुरू हुई। यह दसविसा हरदेवजी मंदिर होकर मानसी गंगा की परिक्रमा करते हुए निकली। शोभायात्रा में मुड़िया संत ढप-ढोलक, मृदंग और हारमोनियम की धुन पर नाचते-गाते चल रहे थे।
विज्ञापन
3 of 6
मुड़िया शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला
सैकड़ों वर्षों से चली आ रही इस अनोखी परंपरा में हर साल हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी, लेकिन इस बार कोरोना के कारण शोभायात्रा में बहुत कम श्रद्धालु शामिल हो सके। जिला प्रशासन ने सशर्त शोभायात्रा निकालने की अनुमति दी थी। इसके चलते शोभायात्रा में आश्रम से जुड़े साधु-संत व स्थानीय लोग ही शामिल हो सके।
4 of 6
मुड़िया शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला
शोभायात्रा में जगह-जगह पुष्प वर्षा हुई। परंपरागत मुड़िया शोभायात्रा में गोवर्धन के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह, चेयरमैन कंचन शर्मा, व्यापार मंडल के गणेश पहलवान, सभासद सियाराम शर्मा गौतम खंडेलवाल आदि शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान पुलिस मुस्तैद रही।
विज्ञापन
5 of 6
मुड़िया शोभायात्रा
- फोटो : अमर उजाला
यह है मान्यता
गौड़ीय संप्रदाय के अनुयायी सनातन गोस्वामी पाद महाराज हर रोज गोवर्धन मानसी गंगा की परिक्रमा लगाया करते थे, लेकिन जब उन्होंने भी देह त्याग किया तो उनकी याद में उनके हजारों शिष्यों ने अपने सिर मुड़वा कर पूरे कस्बे में उनके शव के साथ यात्रा निकाली। तभी से लेकर यह परंपरा चली आ रही है।
गुरु पूर्णिमा के ही दिन मुड़िया संत अपने गुरु की याद में सिर मुड़वा कर परंपरा का निर्वहन करते हैं। इसलिए गोवर्धन में लगने वाले गुरु पूर्णिमा मेले को मुड़िया पूर्णिमा के तौर पर भी जाना जाता है। इस बार कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने गोवर्धन का राजकीय गुरु पूर्णिमा मेला का आयोजन रद्द कर दिया था।