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अलविदा 2018: जब तूफान की रफ्तार से आई तबाही, कुदरत के कहर से 'जख्मी' हुआ ताज

Sat, 29 Dec 2018 12:44 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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फाइल फोटो
साल 2018 में कुदरत ने आगरा पर ऐसा कहर बरपाया, जिसे याद कर लोग आज भी सिहर जाते हैं। तूफान की रफ्तार से आई तबाही ने कोहराम मचा दिया। लगभग 70 लोगों की जान चली गई थी। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इतना ही नहीं कुदरत से कहर से दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल भी जख्मी हो गया थी। अन्य ऐतिहासिक इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गईं थीं। तस्वीरों में देखिए कुदरत के कहर के निशान...
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अलविदा 2018: जब तूफान की रफ्तार से आई तबाही, कुदरत के कहर से 'जख्मी' हुआ ताज

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फाइल फोटो
साल 2018 की पहली तबाही 11 अप्रैल को आई। बुधवार की रात थी। तेज हवाएं चलीं। मकान गिरे। पेड़ गिरे। खंभे उखड़ गए। 19 लोगों की जान गई। देहात में बिजली व्यवस्था ठप हो गई। मूसलाधार बारिश से शहर की सड़कें उखड़ गईं। जनजीवन ठप हो गया था। चारों तरफ हाहाकार मच गया था। किसानों के मवेशी भी मर गए थे। सैकड़ों लोग बेघर हो गए थे। 
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अलविदा 2018: जब तूफान की रफ्तार से आई तबाही, कुदरत के कहर से 'जख्मी' हुआ ताज

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फाइल फोटो
दो मई की रात थी। बवंडर आ गया। तबाही की आंधी 132 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली। इस दौरान कई मकान भी गिरे। लाशों के ढेर लग गए। 50 लोगों की जान गई। पोस्टमार्टम हाउस में शव रखने के लिए जगह नहीं बची थी। 

अलविदा 2018: जब तूफान की रफ्तार से आई तबाही, कुदरत के कहर से 'जख्मी' हुआ ताज

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि कारों से भरे कंटेनर तक पलट गए थे। सौ साल पुराने पेड़ जड़ सहित उखड़ गए। पूरा जिला त्राहिमाम कर उठा था। तूफान से मिले जख्मों पर मुआवजे का मरहम लगाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद आए थे। आंधी में उखड़ी बिजली व्यवस्था कई महीनों में पटरी पर आई।
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अलविदा 2018: जब तूफान की रफ्तार से आई तबाही, कुदरत के कहर से 'जख्मी' हुआ ताज

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फाइल फोटो
अप्रैल और मई के महीने में आई तेज आंधियों से ताज सहित सभी स्मारकों को भारी नुकसान पहुंचा। ताज में पिनेकल गिरे, पत्थर गिरे, पेड़ धाराशाई हुए। फतेहपुर सीकरी में भारी नुकसान हुआ था। सिकंदरा में अकबर के मकबरे में भी पेड़ गिरे। कुदरत के कहर से स्मारक जख्मी हो गए थे। इनकी मरम्मत में भी लंबा वक्त लगा। सैलानियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। और भी स्मारकों में पत्थर गिए गए थे।
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